सही जीवन की दिशा

सही जीवन की दिशा

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सही जीवन की दिशा

बहुत पुरानी बात है, एक आदमी एक फकीर के पास पहुंचा

फकीर ने उसे गौर से देखा, उस आदमी ने फकीर को सलाम किया और कहा

बाबा, मुझे कुछ पूछ्ना है, फकीर ने कहा, पहले एक बात बताओ जो जानना चाहते हो उसके लिये क्या कर सकते हो?

उस आदमी ने कहा, कुछ भी, फकीर ने कहा सोच समझ के जवाब देना, क्युंकि तुम्हारे सवाल का जवाब इसी बात पे निर्भर है, उस आदमी ने घमंड से कहा, जो भी होगा कबूल होगा, एक मर्द का वादा है, फकीर ने उसे देखा और कहा पूछो – उस आदमी ने कहा, मेरे लिये दुआ किजिये

फकीर ने कहा किस बात के लिये दुआ करूं? और दुआ का एक कायदा है और एक कुदरती निज़ाम भी क्या तुम उस कायदे पे इमानदारी से अमल करोगे? उस आदमी ने कहा, जरूर,  मुझे क्या करना होगा?

फकीर ने कहा बेहद आसान है, जिस बात के पूरा होने के लिये दुआ चाहते हो उस बात के खिलाफ सांस भी ना लोगे, बोलो मंजूर है?

वो आदमी सोच मे पड़ गया, बोला समझा नहीं, फ़कीर मुस्कराया और बोला – मानलो तुम कहो तुम्हारी अच्छी सेहत के लिए दुआ करूं तो तुम्हे अपनी सेहत के खिलाफ की जाने वाली सारी बातों, आदतों और हरकतों को इसी पल से बंद करना पडेगा, वरना कितनी भी दुआ करूं कोई भी फ़ायदा होने वाला नहीं, ना तुम्हे और ना मुझे

परमात्मा मेरी दुआओं को नहीं तुम्हारी करनी को देखता है, तुम सेहत की दुआ चाहते हो और हर वो काम भी करोगे जिससे तुम्हारा जिस्म और रूह दोनों खोखले होते रहे, तुम्हारा जिस्म और रूह, हर किस्म की कमजोरी, बिमारी और आफत का घर बन जाए, तो दुआ का कोई असर कभी भी नहीं होगा, चाहे परमात्मा खुद तुम्हारे लिए दुआ क्यों ना करे, यह जीवन हमारे कर्मों का फल है, और हमारे कर्म ही इसमें कोई भी इजाफा या बर्बादी लाते है

और परमात्मा तो दुआ ही है, हर पल दुआ ही कर रहा है हमारे लिए, लेकिन हम ही बद्दुआ बनकर उसकी दुआओं को मटीयामेट कर रहे है, वो दे रहा अपने हजारों हाथों से है,  और हम उसे दोनों हाथों से बेरहमी से बर्बाद कर रहे है, नीच, बातों, लोगों ,संगतों, कामों और हरकतों मे, दुआ क्या करेगी, यदि मंज़ूर है तो जिस बात की बोलो दुआ करूंगा, वो आदमी सोच मे पड़ गया, और अभी तक सोच रहा है, हा हा हा हा

सही जीवन की दिशा

जब हमे ही अपना भला चाहने और उसके हिसाब से जीने मे रूचि नहीं तो किसी को क्या पड़ी है, हमारे लिए कोई भी झंझट मोल ले, इस दुनिया मे हर बात हमसे शुरू होती है, और हम पे ही ख़तम, हर बात, हम तय कर रहे है हर पल, की इस कायनात की हर बात, हर चीज़ हमारे साथ क्या सलूक करे, और हम किस अंजाम के हक़दार बने, जिन्दगी और परमात्मा बस कहते है – तथास्तु

परमात्मा ने हमे अपना विधाता होने की शक्ति, बुद्धि और युक्ति दी हुई है, अब यह हमारा काम है की हम इनके साथ क्या करे, हम इसे अपने और अपने जीवन मे मौजूद, हर बात, शख्श की बेहतरी, निर्माण मे इस्तेमाल कर सकते और अपने और उनके सर्वनाश मे, चुनाव सदा हमेशा हमारा है, आसमान से कोई कुछ तय नहीं कर रहा,

हमारा अंधापन या हमारी जाग्रति ही हमारे जीवन मे हर बात को निर्मित या ध्वंस कर रहा है, बताओ कौन सी दुआ पूरी करना चाहते हो, और शर्त याद रखना, यदि अपने हिस्से की जवाबदारी पूरी की तो इस कायनात मे ऐसा कुछ भी नहीं जो तुम्हारे पास न हो, इमानदारी और पूर्ण समर्पण सबसे पहली शर्त है, जब तक तुम खुद इसे न दो, तुम्हे कभी भी किसी से नहीं मिलेगा, जो भी चाहते हो पहले अपने अंदर पैदा करो और इसे दूसरों को दो, तब तुम्हे दोनों जहाँ की नेमते खुद ईश्वर देगा

जब तक इंसान की चाहतों और उसकी करनी और सोच एक दुसरे के खिलाफ काम कर रहे हो कोई दुआ, कोई समझाइश, कोई भी अच्छी बात का कोई लाभ उस इंसान को नहीं मिल सकता, चाहे वो कितनी भी तीर्थों का दौरा करले, कितना भी ढोंग और आडम्बर करले, उसकी दुर्गति को कोई नहीं रोक सकता

और ऐसा हर मामले मे है, चाहे वो तन का हो मन का हो, प्रेम का हो, संबंधों का हो, कारोबार या किसी भी और सम्बन्ध मे, एक ही नियम है, और एक ही सबका पालनेवाला भी

इस दुनिया मे परमात्मा  की मेहरबानी और दुआओं की कबूलियात सिर्फ  उन लोगों के लिए है, जिनके दिल, दिमाग, रूह और जिस्म  पाक हो, उनके लिए नहीं जो – 

  1. जो किसी से छीन के अपना घर भरना चाहते हो,
  2. जो अपनी खुशी के लिए दुसरे का खुशी और हक  छीनते हो
  3. जो गलत बातों, लोगो और कामों मे यकीन रखते हो
  4. जो दुसरे के हक, खुशी और जीवन के प्रति उदार और जिम्मेदार ना हो
  5. जिनकी जिन्दगी का मकसद सिर्फ अपने स्वार्थों, चाहतों और लालचों की पूर्ती  हो
  6. जो अपने ही लोगों के नीच स्वार्थ, नीच परम्पराओं, अहंकार और सत्ता को बनाये रखने के लिए और उनकी गंदी  चाहतों के लिए मासूमों के हक, सपनों, सम्मान की कुर्बानी दे देते हो
  7. जो अपनी जिम्मेदारी को नीच, लालची और खुदगर्ज़ के हाथों मे सौंप कर अपने फ़र्ज़ से कतराते है या पूरा नहीं करना चाहते
  8. जो खुद अपने हाथों अपने तन, मन और जीवन का सर्वनाश करने पे तुले हो, साथ ही अपने से जुडी मासूम जिंदगियों का भी

उम्मीद है पसंद आया होगा, ना भी आये तो यह परमसत्य है जीवन का इसके परे कुछ कभी किसी को न कुछ मिला न कभी मिल सकेगा

परमात्मा सभी को सद्बुद्धि, स्वास्थ्य और सदमार्ग प्रदान करे

आपका दिन शुभ हो

अमेजिंगसुबाहू

 

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