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सही गुरु को कैसे पहचाने?

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सही गुरु को कैसे पहचाने?

आप कैसे तय कर सकते हैं की वो सच्चे हैं या नहीं? आपके पास कौनसा पैमाना है यह जानने का? यदि आप इतने समझदार और ज्ञानी हैं तो इस झंझट मे क्यों पड़ रहे है की वो सच्चे हैं या झूठ? आप अपना काम कीजिये और उन्हें अपना करने दीजिये।

इस धरती पर जितने व्यक्ति है उतने सारे रास्ते हो सकते हैं, सबकी अपनी खोज और उपलब्धियां है, कोई किसी मार्ग से कोई किसी मार्ग और विधि से और कुछ लोग अपने आतंरिक विकास के परिणामस्वरूप बिना किसी कोशिश और बाहरी बात के ज्ञान को उपलब्ध होते हैं। और जिस रास्ते उन्होंने उपलब्ध किया है कुछ भी वो उसके बारे मे ही बोलेगा, यही सच्चे व्यक्ति की पहचान है।

बेहतर यह होगा की आप उनके बारे मे कोई धारणा न बनाए की वो क्या कह रहे हैं उस पर गौर कीजिये, जाँच कीजिये और प्रयोग करके उसकी सच्चाई और प्रभाव को स्वयं देखिये, आपने शायद सुना और पढ़ा होगा, सद्गुरु कबीर साहब ने कहा है

“जाति न पूछो साधु की, पूछ लीजिये ज्ञान,मोल करो तरवार का, पड़ा रहन दो म्यान।”

यदि कोई व्यक्ति और उसकी बातें आपको रुचिकर लगती हैं या उसमे आपको कोई भी सच्चाई या गुण नज़र आता है तो आप उस बात या तथ्य की परीक्षा करके देख लीजिये स्वयं प्रयोग करके, यदि आपको उससे लाभ या अनुकूल परिणाम मिलते हैं तो वो आपके लिए सही है।

सही गुरु को कैसे पहचाने?

कुछ बातों को आप दूर से देखकर नहीं जान या पहचान सकते उसके लिए आपको उन चीजों और बातों के करीब जाकर देखना, समझना और बारीकी से निरिक्षण करना होगा, और बहुत बार सिर्फ उन बातों को अमल करके, या प्रयोग करके ही उनकी सार्थकता, सच्चाई या वास्तविकता का पता लगाया जा सकता है।

अतः सुनी सुनाई और देखि दिखाई पर नहीं स्वयं के अवलोकन, निरिक्षण और प्रयोग और परिक्षण से उपलब्ध परिणाम और व्यक्ति पर भरोसा करें, बिना किसी पूर्वाग्रह और तय मान्यता के बिना।

सच्चे गुरु की बातों और तरीकों मे रूपंतारंकारी प्रभाव होता है, आप उनके जादू और सत्य की शक्ति से अछूते नहीं रह सकते, आप उनकी और खींचे चले जाते हैं चाहे वो आप के खिलाफ ही क्यों न लगे आप स्वयं को रोक नहीं पाएंगे।

उनके पास आपको अपने बहुत सारे अनुत्तरित सवालों के जवाब मिलेंगे, वो आपकी मूढ़ताओं और मूर्खताओं को उजागर करेंगे, वो आपकी चापलूसी नहीं करेंगे, वो आपके अहंकार को पोसने नहीं तोड़ने का काम करेंगे, उनकी बातों से आपको भय भी हो सकता है, लेकिन वो अभय प्रदान करते हैं आपको पूरी तरह से स्वीकार कर और आपको आपके वास्तविक स्वरुप और स्वभाव से परिचित कराकर।

वो आपकी मूर्खतापूर्ण ख्वाहिशों की पूर्णता का आश्वाशन नहीं देंगे आपके जीवन के लिए जो स्वास्थ्यकारी और श्रेष्ठ होगा उसके बारे मे मार्गदर्शन करेंगे और उससे जुड़ने की विधि और माध्यम बताएँगे, वो आपको बेहतर बनाने के लिए होते है, आपको खुश करने के लिए नहीं।

वो आपके आसपास झूठ, बनावट और भ्रम की सारी परतों को छिन्न भिन्न कर देंगे और आपको एक नए बोध और अनुभव से भर देंगे, जहाँ ऐसा हो समझना सही जगह पहुँच गए हैं।

सच्चा गुरु आपको विस्तार और गुणात्मकता के लिए तैयार करेगा, वो आपको आपकी शक्तियों और दोषों दोनों को दिखायेगा और दोषों से मुक्त और शक्तियों को जगाने की विधि और मार्ग भी सुझाएगा, वो आपका सच्चा मित्र, कठोरतम आलोचक, और सबसे स्नेही मित्र होगा। सच्चे गुरु के सम्बन्ध मे सद्गुरु कबीर ने एक और सत्य कहा है –

गुरु कुम्हार शिष्य कुम्भ है, गढ गढ काढे खोट |
अंदर हाथ सहारा देत, और बाहर मारे चोट ||

अब आप देखिये कौन इनमे से कितनी बातों को पूरा करनेवाला है आपकी नज़र और अनुभव मे, यह खोज है, कोई बना बनाया जवाब कहीं से नहीं मिलेगा, गुरु सिर्फ इशारे करता है बाकि काम आपको करना होता है, तो इशारे सामने है शुरू हो जाइये।

और यह तो कुछ छोटी मोटी बातें है एक सच्चे सद्गुरु के सम्बन्ध मे, उन्हें किसी सीमा और शब्दों मे नहीं बांधा जा सकता है, मेरे जीवन मे जीवंत और सबसे शानदार गुरुओं से बोध और जाग्रति मिली वो हैं ओशो और सद्गुरु जग्गी वासुदेव, इन्हें पढ़िए, सुनिए और देखिये आपको पता चल जायेगा एक सच्चे गुरु मे क्या गुण होता है और वो कैसे आपके जीवन को बिना उनकी शारीरिक उपस्थिति और मुलाकात के पूरी तरह बदल सकते हैं, धन्यवाद।

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