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सफलता क्या है, और कौन सफल है?

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सफलता क्या है, और कौन सफल है?

सबसे पहले ये जान लेते हैं, सफलता किस चिड़िया का नाम है? सफलता क्या है, और कौन सफल है? सफलता से आपका क्या तात्पर्य है? इस दुनिया में हर व्यक्ति के लिए सफलता का अलग पैमाना होता है, और देखनेवालों की दृष्टि भी अलग अलग होती है।

सफलता क्या है

यहाँ सभी लोग अपने सपने और लक्ष्य का या उस बात का पीछा कर रहे हैं जो उन्हें लगता है उनके लिए जरुरी है, या जिसके मिल जाने से उनके जीवन में कुछ बहुत बेहतर हो जायेगा, उन्हें, संतुष्टि, परितृप्ति या सफलता या सार्थकता महसूस होगी, इसे पा लेना ही उनके लिए सफलता का पैमाना है, यह मानव स्वभाव है, और हम सभी इससे बंधे हुए जीते हैं।

हम जिस दुनिया में जीते हैं वहां कुछ बातें प्रचलित हैं, घर परिवार से लेकर सामाजिक व्यवस्था तक, यहाँ कुछ मानक और प्रतिमान निश्चित कर दिए गए हैं प्रत्येक व्यक्ति के लिए की उसे क्या करना चाहिए, क्यूँ करना चाहिए, उसकी सार्थकता क्या है वगैरह वगैरह।

जैसे पढाई करना, नौकरी या व्यापार पा लेना, शादी कर लेना, घर बना लेना, कार, बैंक बैलेंस, सामाजिक प्रतिष्ठा प्राप्त करने के यह उपाय हैं, लोग इन स्थितियों को पाने के लिए जीवन भर संघर्ष करते हैं, अब इनमें से कुछ इस दुनिया में जीने और कार्य करने के लिए निश्चित ही बेहद जरुरी हैं, इनके बगैर आप एक सुखद और सम्मानपूर्वक जीवन नहीं जी सकेंगे।

सफलता क्या है, और कौन सफल है?

फिर इसमें भी प्रतिस्पर्धा और महत्वाकांक्षा है, बहुत अच्छे स्कूल और कॉलेज में पढना, बहुत अच्छी नौकरी और व्यवसाय करना, बहुत बड़े घर और कार खरीद लेना, बहुत सारा धन सम्पत्ति एकत्रित कर लेना, और बहुत कुछ है।

अब जिसकी जैसी क्षमता और कामना और  पागलपन वैसे इनका विस्तार, इसमें कोई भी बुराई नहीं यदि यह लोगों को अस्वस्थ, बीमार, उन्मादी और अपराधी नहीं बनाती।

यहाँ किसी को धन चाहिए, किसी को अपने प्रेमी या प्रेमिका चाहिए, किसी को धन वैभव और पद चाहिए, किसी को किसी और लक्ष्य के मिल जाने की आस है।

इस तरह सभी अपनी स्थिति से एक दुसरे बिंदु या स्थिति की ओर गति कर रहे हैं, और अपना जीवन, शक्ति, उर्जा और साधन, समय इसमें लगा रहे हैं, और जब वो अपने लक्ष्य पा लेते हैं तो उन्हें और दुसरे लोगों को लगता है वो सफल हैं, यही इस दुनिया में प्रचलित है।

इस तरह इस दुनिया में यह सफलता का चक्कर चल रहा है और लोग इसकी ओर दौड़ रहे हैं और जब वो अपने निर्धारित लक्ष्य तक पहुँच जाते हैं तो उन्हें और उन जैसे लक्ष्य और कामना रखने वाले सभी लोग समझते हैं की वो व्यक्ति सफल है क्यूंकि उसने उनके निर्धारित लक्ष्य, वस्तु, स्थिति, परिणाम को प्राप्त कर लिया है, लेकिन क्या यह यहीं समाप्त हो जाता है?

तो सामान्य तौर पर यह सब हासिल कर लेना सफलता है इसके अलावा कुछ लोग किसी कार्य विशेष क्षेत्र विशेष, कला या हुनर में पारंगत होने को सफलता समझते है, किसी खास पद या पुरुष्कार की प्राप्ति को सफलता समझते हैं और इस दिशा में कार्यरत रहते हैं जैसे खिलाडी, संगीत, नृत्य, चित्रकारी और अन्य विविध कलाओं और रचनात्मक गतिविधियों में संलग्न व्यक्ति और संस्थाएं।

इस तरह सारा जीवन और जगत जो है उससे कुछ और बेहतर  होने के लिए प्रयासरत है, गतिमान है, सभी की आकांक्षा विस्तार और अधिक पा लेने की है, सब लोग कुछ जोड़ना चाहते हैं, अपने आप के साथ, ताकि स्वयं को अधिक विकसित, विस्तृत और शक्तिशाली अनुभव कर सकें, यह हर जीव की आतंरिक आकांक्षा है, और सभी अपनी बुद्धि, शक्ति और सामर्थ्य से इस दिशा में अग्रसर हैं।

कौन सफल है? 

अब यहाँ कुछ लोग अपने उद्देश्यों में सफल हो जाते हैं और कुछ वांछित परिणाम प्राप्त नहीं कर पाते हैं, तो एक को सफल और दुसरे को असफल होने का लेबल लगा दिया जाता है।

क्या वास्तव में ऐसा सत्य है, और जो लोग अपने लक्ष्य को प्राप्त कर लेते हैं क्या वो सदा इससे खुश संतुष्ट और तृप्त रहते हैं? क्या इसके बाद उनके जीवन में कुछ और हासिल करने की चाहत या वासना शेष नहीं रह जाती है? 

जब व्यक्ति एक लक्ष्य को प्राप्त कर लेता है तो, उसी समय वह उसके लिए व्यर्थ हो जाता है, क्यूंकि उसे उससे आगे की बात दिखाई पड़ने लगती है, जैसे एक व्यक्ति बेरोजगारी और निर्धनता की स्थिति से 25000 रूपये प्रति माह कमाने लग जाये, कुछ समय में तो उसने एक लक्ष्य अर्जित कर लिया, लेकिन इस अवस्था को प्राप्त करते ही उसे लगने लगता है की यह तो कुछ भी नहीं है, उसे 50000 रूपये कमाना चाहिए।

इस तरह यह अंतहीन सिलसिला चलता रहता है, क्यूंकि मनुष्य न चाहते हुए भी जो कुछ भी उसने इस जगत से पा लिया है उससे संतुष्ट नहीं रह पाता, जितना वो यहाँ पाता है उतनी उसकी प्यास बढ़ते जाती है और एक खालीपन और सूनापन उसके जीवन में सदा भरा हुआ रहता है।

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जीवन का स्वभाव है विस्तार और फैलाव, मनुष्य की सारी गति, प्रगति का लक्ष्य अनंत विस्तार को उपलब्ध करना है, इतना की फिर कुछ भी पाने को शेष नहीं रह जाये, यही प्यास सभी के अंदर है, एक छोटे से कीड़े से लेकर सबसे शक्तिशाली व्यक्ति तक,  इसलिए मनुष्य एक स्थिति से दूसरी स्थिति और अनुभव की ओर गति करता रहता है और एक दिन समाप्त हो जाता है।

कुछ लोगों के लिए धन, दौलत, शोहरत पाना सफलता होती है, कुछ लोगों के लिए स्वयं को और अपने भीतर परम को पाना, इस जगत में सभी प्राणी और मनुष्य चेतना और समझ के विभिन्न तल पर जी रहे हैं और अपने जाने अनजाने, सही गलत, स्पष्ट और धुंधले लक्ष्यों का पीछा कर रहे हैं, यह जाने बगैर की इससे उन्हें सचमुच ख़ुशी या जिसे वो सफलता कहते हैं मिल जाएगी

सत्य तो यह है कि सभी लोग अपने विकास के विभिन्न चरणों में है, कोई सीख रहा है, कोई  बेहतर हो चुका है और उसकी भव्य रूप में अभिव्यक्ति में समर्थ हो गया है।

यहाँ सभी की एक ही आकांक्षा है की उसे वो मिल जाये जिसके बाद उसे किसी चीज़ की जरुरत न रहे।

अब सवाल यह है की क्या इस दुनिया में कोई भी पदार्थ, सम्पति, पद, सम्मान, रिश्ता, या कुछ भी ऐसा है जो मनुष्य की इस अंतहीन प्यास और खोज को तृप्त या पूरा कर सके?

और क्या यह सब मिल जाने के पश्चात् भी मनुष्य की प्यास और खोज ख़त्म हो जाती है, इसे जाने बिना और पाए बिना कोई भी बात, कोई भी दुनियावी उपलब्धि आपको सफल नहीं बना सकती है, आपकी खोज और प्यास मिट नहीं सकती है।

आज दुनिया में यही सभी किस्म की उपलब्धियों, सफलता और समृद्धि पाकर भी लोग अत्यंत बीमार, हताश, और दुखी हैं, निश्चित ही यह सभी उपलब्धियां, सामान, सुख भोगपद, प्रतिष्ठा उन्हें समस्याओं और दुखों से मुक्त नहीं कर पा रहे है, बल्कि इन सभी चीजों से उसमें वृद्धि हो रही है, तो फिर हम इसे सफ़लता कैसे कह सकते हैं

आज अमरीका और अन्य बेहद समृद्ध और विकसित देशों में मनोरोगियों की संख्या सबसे अधिक है, उनकी 60 से 70% आबादी जिनमें 14 वर्ष की उम्र के बच्चे भी शामिल हैं मनोरोग से ग्रस्त हैं, बिना दवा लिए वो सो नहीं सकते और न ही सामान्य व्यव्हार कर सकते हैं, क्या यह सफलता है, हमारे देश में 40% आबादी को दोनों वक़्त का भोजन उपलब्ध नहीं है, क्या यह हमारे समाज और समुदाय की सफलता है? 

इस सवाल का जवाब मिल जाना ही वास्तविक सफलता है, जिसे हमारी संस्कृति ने सबसे अधिक मूल्य दिया है, यह सबसे बड़ा सवाल है, जिसका जवाब हमे खोजना है, इसकी प्राप्ति ही हर किस्म की बेचैनी, भय, दौड़ और संघर्ष से मुक्ति है, और सवाल यह है की हमारा वास्तविक स्वरुप क्या है, और हम कैसे इसे जान सकते हैं और इसे प्रकट कर सकते हैं।

कोई संत, महात्मा हो, या अत्यंत साधारण मनुष्य हो या शक्ति, पद और अहंकार के नशे में चूर, कोई अत्याचारी, सभी को एक ऐसी चीज़ की तलाश है जिसे पाने के बाद उनकी कोई चाह न रह जाये, वो सारे, दुःख, अभावों और भयों से मुक्त हो जाएँ, जब तक यह न हो जाये तब तक सफलता का कोई भी अर्थ नहीं है।

इसी एक चाहत को पूरा करने के लिए इस पूरी पृथ्वी पर लोग हर किस्म के कार्यों को अंजाम दे रहे हैं, बिना इस बात को समझे की वो क्या चाहते हैं और वो उन्हें कैसे मिलेगा, बस सभी पर एक पागलपन सवार है, और लोग दौड़े चले जा रहे हैं, यह जाने समझे बगैर की यह उन्हें उनके गंतव्य तक ले जायेगा या नहीं।

एक की चाहत कुछ भी करके उन चीज़ों को हासिल करना होता है जिन्हें वो अपनी चाहत बना लेता है, वो बस सब इकठ्ठा करते हुए, उसके लिए लड़ते हुए, सबसे दोस्ती दुश्मनी करते हुए, उसकी फिक्र करते हुए मर जाता हैकुछ लोगों के लिए सब कुछ खोकर, खुद को पाना सबसे बड़ा लक्ष्य होता है, वो इसमें ही मसरूफ रहते हैं अब आप कैसे तय करेंगे कि कौन सफल है और कौन असफल?

जो दुनिया और दुनियादारी में मसरूफ है, उसके लिए यहां की सब बातें कीमती है, जो इस दुनिया से बेज़ार है उसके लिए यह सब मिट्टी है। एक कि नजर में दूसरा असफल है, बेवकूफ है, आप क्या कहेंगे इसके लिए, और कुछ लोग इसी मृग मरीचिका में फंसकर नष्ट हो जाते है। तो यह तो स्पष्ट है की सब किसी एक चीज़ की तलाश में है, जिसे पाकर उनके सारे भाव, इच्छाएं और भटकन समाप्त हो जाये, तो वो क्या है, उसकी प्राप्ति ही वास्तविक सफलता है, और वही मानव जीवन का परम लक्ष्य है।

मेरी नजर में असफल वो है, जिसे खुद की पहचान नहीं है, जो यह नहीं जानता कि उसके जीने का मकसद क्या है, बाकी सब चीजें होना ना होना कोई मायने नहीं रखता।

यह  बहुत अर्थ नहीं रखता की लोग आपको क्या समझते और कहते हैं, यह अर्थ रखता है की आप अपने बारे में वास्तविक रूप से क्या जानते और समझते हैं, और क्या आप उस दिशा में गतिशील हैं जो आपको अपने आप से जोड़ दे और स्वयं के वास्तविक स्वरुप से साक्षात्कार करने में सहयोगी हो सके

कुछ सवाल खुद से कीजिये  – क्या आप एक चेतना पूर्ण ढंग से जीवन जी रहे है? क्या आपका जीवन आपके लिए और आपके आसपास सभी लोगों के लिए आनंद और बोध की सृष्टि कर रहा है? क्या आप जो कर रहे हैं वो आपको ज्यादा, आनंदित, मुक्त और स्वस्थ और गुणवान बना रहा है? यदि हां तो इसमें और वृद्धि कीजिये और नहीं,  तो रुकिए,  सही दिशा और मार्गदर्शन प्राप्त कीजिये।
कहानी का सार 

समस्त बुद्ध पुरुषों ने कहा है – बोध पूर्वक जीना और सबके लिए महत्तम कल्याण की सृष्टि करना सबसे बड़ी सफलता है, बेहोशी में जीना और अपने लिए और सभी के लिए दुःख, अपमान, कष्ट और संकट उत्पन्न करना असफलता है।

बोधपूर्वक जीना ही जीवन की सार्थकता है, और बेहोशी और अचेतनता में जीना व्यर्थ है,  मृत्यु है,  यही वास्तविक सफलता और असफलता है,  देखिये आप किस बात के अधिकारी हैं या होना चाहते हैं।

सफलता क्या है, और कौन सफल है?

मैंने जीवन भर बहुत सपन्न, तथाकथित सफल लोगों को सबसे ज्यादा दुख और तकलीफ पाते देखा है, और अपने नाम, दौलत और समृद्धि के हाथो बेमौत मरते देखा है, और बेनाम, बेदाम के लोगों को बेहद जिंदादिल और मस्त, अब बताइए सफल किसको कहेंगे?

इसका यह अर्थ नहीं है की धन, संपत्ति और उपलब्धियों का कोई मूल्य नहीं है, आप इन सभी के लिए क्या मूल्य चूका रहे हैं और यह आपको और दूसरों को क्या सन्देश और प्रेरणा प्रदान कर रहा है, यह सबसे महत्वपूर्ण है।

इसलिए मेरे दोस्त सफलता, असफलता के गणित में पड़ने से कोई मतलब नहीं यहां हर एक की अपनी परिभाषा है इस संबंध में। वास्तविक बात यह है की जो कुछ भी आप कर रहे हैं क्या वो आपके जीवन में गुणवत्ता, शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य, प्रेम और उल्लास में वृद्धि करने वाला है या नहीं, आप धन कमा रहे हैं या नहीं, आप प्रतिष्टित या प्रसिद्द है या नहीं ये इतना महत्वपूर्ण नहीं है।

जो अपनी काबिलियत और क्षमता को ना पहचाने और इसका पूरा इस्तेमाल अपने और सभी के कल्याण के लिए ना कर पाए तो वो असफल है, चाहे वो कुबेर हो या सड़क का भिखारी, हमें इस दिशा में ही कार्य करने की आवश्यकता है, यही असली सफलता है।

इस हिसाब से धरती पर 99% लोग पूरी तरह असफल है, क्यूंकि जिनके पास सबकुछ है वो भी दुखी है और खुद के और दूसरों के जीवन को बेवकूफियों और पागलपन में नष्ट कर रहे है। और जिनके पास कुछ नहीं है वो अपनी क्षमता को भूलकर दूसरों की दया और दान पर जीने को अपना नसीब समझते है?

अब बताइए, किसको सफल बोले, यहां?

मेरी नजर में सफल वो है जो आज अभी हर पल का आनंद लेे रहा है, जिसके यहां होने से उसके और दूसरों के चेहरे पे मुस्कान है और दिल में रोशनी है, बाकी सब व्यर्थ और बकवास है।

अब बताओ इसको क्या कहेंगे, मै अपने आसपास सुबह से शाम तक गधे और बैलों की तरह नौकरी और धंधे में फंसे लोगों को बेहद दुखी असंतुष्ट और परेशान देखता हूं, वो न चाहते हुए भी ऐसा कर रहे हैं, क्यूंकि उन्हें पता ही नहीं वो ऐसा क्यूँ कर रहे हैं? 

सदगुरु कहते हैं, वास्तविक सफलता क्या है और हम इसे कैसे अर्जित कर सकते हैं –

यदि ऐसा नहीं हुआ तो कोई भी सफल नहीं है, मुक्ति पथ पर अग्रसर होना और उसे प्राप्त करना ही वास्तविक और प्रथम और अंतिम सफलता है

धन्यवाद।

अमेजिंग सुबाहू

क्यों कुछ लोग कभी सफल नहीं होते? यह प्रश्न Quora पर मेरे एक प्रबुद्ध पाठक ने पूछा था।

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6 comments

    1. धन्यवाद भाई, और भी शानदार लेख उपलब्ध हैं, ब्लॉग पर, पढ़िये और कंमेंट और share कीजिये।

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