वात्स्यायन द्वारा ‘कामसूत्र’ ग्रंथ क्यों लिखा गया था?

इस बारे में तो वात्स्यायन ही बता सकते हैं कि उन्हें कामसूत्र लिखने की प्रेरणा और आवश्यकता क्यों महसूस हुई थी, इतना जरूर कहूंगा उन्होंने मानव जाति को इस परम शक्तिशाली काम उर्जा के उचित नियोजन और इसके सही क्रियान्वयन की वैज्ञानिक और व्यवस्थित विधियाँ और जानकारी इस ग्रन्थ मे सम्पादित कर मनुष्य जाति को यह अनुपम भेंट प्रदान की है। काम को हमारी संस्कृति में मनुष्य जीवन के चार परम पुरुषार्थ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष मे से एक निश्चित किया गया है। काम को नियमित और सही तरीके से नियोजित किये बिना जीवन को संपुष्ट, सुरुचिपूर्ण और कल्याणकारी रूप[…]

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क्या हमारे घरों में बेटी और बहू को समान समझा जाता है?

क्या हमारे घरों में बेटी और बहू को समान समझा जाता है? हमारे घर में हमारी प्यारी बहन को बहुत प्यार और अच्छी शिक्षा दी गई और वो जिस घर में गई उसे बेहद प्यार और सम्मान मिला है, वो बेहद समझदार, मेहनती और कुशल बेटी, पत्नी, गृहणी, और मां है। हमारी मां ने उसे और हम सभी को सभी बातों और काम की बेहतर शिक्षा दी और हमारी मां और बहन दोनों सुपर वुमन है, मैंने उनकी तरह काम करते बहुत कम महिलाओं को देखा है। हम लोगो को उनके हाथ से काम छीनना पड़ता है और कहना पड़ता[…]

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हिन्दू धर्म को श्रेष्ठ वैज्ञानिक धर्म क्यों माना जाता है?

हिन्दू धर्म को श्रेष्ठ वैज्ञानिक धर्म क्यों माना जाता है? मुझे पता नहीं कि हिन्दू धर्म के संबंध में लोगो की अवधारणा या सोच क्या है, लोग क्या जानते है, क्या समझते है, और क्या देखते है, और उसका आधार क्या है? जहां तक मेरी अपनी समझ और दृष्टि है अपने देश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के बारे में हमारे अवतारों, सिद्ध महामानवों, और मुक्त पुरुषों की दृष्टि, अभिव्यक्तियों और अनुभव की रोशनी में जिसका कुछ अंश यहां प्रस्तुत कर रहा हूं, आप इस संबंध में खोज कर सकते है और सत्य जान सकते हैं। यह धरती और यहां[…]

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सच्चे और ढोंगी गुरु मे क्या फर्क है?

सच्चे और ढोंगी गुरु मे क्या फर्क है? सच्चाई और प्रभाव को स्वयं देखिये, आपने शायद सुना और पढ़ा होगा, सद्गुरु कबीर साहब ने कहा है “जाति न पूछो साधु की, पूछ लीजिये ज्ञान,मोल करो तरवार का, पड़ा रहन दो म्यान।” यदि कोई व्यक्ति और उसकी बातें आपको रुचिकर लगती हैं या उसमे आपको कोई भी सच्चाई या गुण नज़र आता है तो आप उस बात या तथ्य की परीक्षा करके देख लीजिये स्वयं प्रयोग करके, यदि आपको उससे लाभ या अनुकूल परिणाम मिलते हैं तो वो आपके लिए सही है। कुछ बातों को आप दूर से देखकर नहीं जान[…]

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सही गुरु को कैसे पहचाने?

सही गुरु को कैसे पहचाने? आप कैसे तय कर सकते हैं की वो सच्चे हैं या नहीं? आपके पास कौनसा पैमाना है यह जानने का? यदि आप इतने समझदार और ज्ञानी हैं तो इस झंझट मे क्यों पड़ रहे है की वो सच्चे हैं या झूठ? आप अपना काम कीजिये और उन्हें अपना करने दीजिये। इस धरती पर जितने व्यक्ति है उतने सारे रास्ते हो सकते हैं, सबकी अपनी खोज और उपलब्धियां है, कोई किसी मार्ग से कोई किसी मार्ग और विधि से और कुछ लोग अपने आतंरिक विकास के परिणामस्वरूप बिना किसी कोशिश और बाहरी बात के ज्ञान को[…]

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क्या विज्ञापनों पर भरोसा करना चाहिए?

क्या विज्ञापनों पर भरोसा करना चाहिए?

क्या विज्ञापनों पर भरोसा करना चाहिए? विज्ञापन का उद्देश्य आपको आकर्षित करने और उपभोग के लिए तैयार करने से है, इसके लिए वो हर संभव प्रतीक, भावनाओं और नाटकीयता का प्रयोग करते हैं ताकि उनके उत्पाद की छवि आपके मनस पर अंकित हो जाये और आप चेतन या अचेतन रूप से उन उत्पादों का क्रय और उपभोग करते रहे। इन विज्ञापनों के लिए उत्पादनकर्ता और मार्केटिंग संस्थाएं बेशुमार धन और लोकप्रिय बातों, कथाओं, प्रतीकों और सेलिब्रिटीज की मदद भी लेती है, जिन्हें जनता द्वारा मान्यता या स्वीकृति प्राप्त है। आधुनिक विज्ञापनकर्ता बहुत सारी बातों को अवचेतन रूप से उपभोक्ताओं के[…]

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