क्या विज्ञापनों पर भरोसा करना चाहिए?

क्या विज्ञापनों पर भरोसा करना चाहिए?

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क्या विज्ञापनों पर भरोसा करना चाहिए?

विज्ञापन का उद्देश्य आपको आकर्षित करने और उपभोग के लिए तैयार करने से है, इसके लिए वो हर संभव प्रतीक, भावनाओं और नाटकीयता का प्रयोग करते हैं ताकि उनके उत्पाद की छवि आपके मनस पर अंकित हो जाये और आप चेतन या अचेतन रूप से उन उत्पादों का क्रय और उपभोग करते रहे।

इन विज्ञापनों के लिए उत्पादनकर्ता और मार्केटिंग संस्थाएं बेशुमार धन और लोकप्रिय बातों, कथाओं, प्रतीकों और सेलिब्रिटीज की मदद भी लेती है, जिन्हें जनता द्वारा मान्यता या स्वीकृति प्राप्त है।

आधुनिक विज्ञापनकर्ता बहुत सारी बातों को अवचेतन रूप से उपभोक्ताओं के मन मस्तिष्क मे प्रविष्ट करने के प्रयास मे लगे हुए हैं, उनका उद्देश्य इन विज्ञापनों के द्वारा उनके घरों और जेबों तक पहुंचना और उन्हें उन उत्पादों के उपभोग का आदी बनाना है।

इसके लिए वो हर संभव युक्ति और आंकड़े उपभोक्ताओं की उम्र, पसंद, क्रय शक्ति, आय, और पसंदीदा ब्रांड्स, और उनकी अपेक्षाओं के बारे मे इकठ्ठा करते है, गूगल, फेसबुक और सभी सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफार्म जिनके साथ हम सब जुड़े होते हैं, इन सभी कंपनियों को हमारी जानकारी उपलब्ध करते है और अरबों रूपये कमाते है, जिसके बारे मे आम उपभोक्ता को पता भी नहीं है।

इन विज्ञापनों को तैयार करने के लिए वो बेहद रिसर्च करते है और हमारी पसंद, नापसंद, रूप रंग, आकर, स्वाद, मूल्य प्रदान करने की इच्छा शक्ति आदि सभी बातों से सम्बन्धी आंकड़े विभिन्न विधियों और साधनों से एकत्रित करते है, और उसके अनुरूप हम पर सामाजिक, आर्थिक, भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक रूप से प्रभाव डालने वाले विज्ञापन तैयार करते है।

विभिन्न शोध से यह जानकारी मे आया है की वो उत्पाद की पैकेजिंग, कलर, साइज़, और उसपे मुद्रित प्रतीकों, व्यक्तियों और अन्य प्रभाव पैदा करने वाली बातों को उनके लिए लाभदायक तरीके से ही प्रस्तुत, प्रकाशित और विज्ञापित करते है ताकि उपभोक्ताओं के मनस मे उनके उत्पादों की सकारात्मक और बेहतर छवि बने और वो उने उत्पादों का उपयोग करने के आदी बन जायेऔर उन्हें दुसरे लोगो तक पहुचाये माउथ पब्लिसिटी और अपने बार बार उपयोग द्वारा।

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किसी भी माध्यम (टीवी, अखबार, पत्रिकाएं, इन्टरनेट, डिस्प्ले बोर्ड्स आदि) पर प्रकाशित और जारी किये जाने वाले अधिकाँश विज्ञापनों के सम्बन्ध मे यह सत्य है, उन्हें वास्तविकता से परे मुलम्मा चढ़ाकर और अतिश्योक्ति पूर्ण तरीके से प्रकाशित और प्रदर्शित किया जाता है जो उनकी वास्तविक गुणवत्ता से सदैव बहुत दूर होता है। सदैव इन्हें मनोरंजन के लिए देखिये और इनसे बिलकुल भी प्रभावित मत होइए।

किसी भी उत्पाद को खरीदने से पहले इसके बारे मे पर्याप्त शोध कीजिये, अन्य उपभोक्ताओं के अनुभव और उदगार जानिये, रिव्यु देखिये, अपने आस पास मे कोई इनका उपभोक्ता हो तो उसके अनुभव और नजरिये को जानिए और अपने विवेक, आवश्यकता और समझ के अनुसार इनका उपभोग कीजिये।

मै कभी भी टीवी या किन्ही भी माध्यमों पर प्रकाशित होने वाले विज्ञापनों, खास तौर से हमारे तथाकथित सितारों द्वारा प्रचारित और प्रायोजित उत्पादों से बिलकुल भी प्रभावित नहीं होता, अपनी जांच परख और आवश्यकता के अनुसार ज्यादा सही, और बेहतर उत्पादों का क्रय और उपभोग करना पसंद करता हूँ, विज्ञापन सिर्फ मनोरंजन के लिए देखता हूं, अपने क्रय सम्बन्धी निर्णयों के लिए बिलकुल भी नहीं।

आप किसी भी उत्पाद के सम्बन्ध मे प्रचारित या प्रकाशित आपतिजनक या भ्रमपूर्ण जानकारी के सम्बन्ध मे शिकायत दर्ज करा सकते हैं और अपनी बात या शिकायत संबन्धित विभाग मे दर्ज कर सकते हैं।

एक अंतिम बात “ दिखावे पर मत जाओ , अपनी अकल लगाओ”

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