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क्या हिन्दू, दुनिया में सबसे ज्यादा उदारवादी है?

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क्या हिन्दू, दुनिया में सबसे ज्यादा उदारवादी है?

जी हाँ, और सबसे ज्यादा मूर्ख भी, आप पूरे विश्व का इतिहास देख लीजिये, जितनी दरियादिली और उदारता हिन्दुओं ने दूसरे सभी संप्रदाय और जाति और मूल के लोगो के साथ निभाई है ऐसा और कौन है, यहाँ सभी को समान अधिकार और सम्मान दिया गया है।

यहाँ तक के जिन जाति के लोगो ने इस देश पर हमला किया, और सैकड़ों वर्षों तक शासन किया उन्हें भी स्वीकार और अंगीकार किया, बिना किसी भेदभाव के और पक्षपात के बल्कि उन्हें तो यहाँ के मूल निवासियों से ज्यादा अधिकार और सुविधाएँ उपलब्ध है।

दुर्भाग्य तो यह है की वो ही लोग जिन्हें यहाँ स्वीकार किया गया, इस देश और समाज का अंग स्वीकार किया उन्होंने ने ही इस देश मे आतंक, बिखराव और विभाजन किया और आज भी यह सब करने के लिए जिम्मेदार बने हुए हैं, वो इस मिटटी के प्रति अपने धर्म और वफादारी को भूल गए हैं, इसी की महिमा और अस्मिता को मिटाने पर तुले हुए हैं।

हिन्दुओं की उदारता ने उन्हें गुलामी, जाति और धर्म परिवर्तन, अत्याचार और उत्पीडन, बलात्कार और हत्याएं ही मिली है पिछले १२०० वर्षों मे इसके परिणाम स्वरुप, और आज भी यही हो रहा है।

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हिन्दुओं के विघटित रहने और एक दुसरे के प्रति भेदभाव करने की वजह से मुग़ल और तुर्क हमलावर और ईसाई मिशनरीयों को भारी मात्रा मे इस देश के उपेक्षित और निम्न कहे जाने वाले वर्ग को मुसलमान और ईसाई बनाने मे सफलता मिली, क्यूंकि वो उच्च जाति के हिन्दुओं से मिली उपेक्षा और तिरस्कार की वजह से हिंदुत्व और सनातन धर्म से विमुख होने को तैयार हुए और आज भी भारी मात्रा मे ये धर्म परिवर्तन किया जा रहा है, हिन्दुओं के विरुद्ध की जा रही साज़िश का हिस्सा है।

अतः हिन्दुओं को सर्वप्रथम सभी हिन्दू सप्रदाय और वर्गों के लोगों को इस धर्म परिवर्तन और लोभ और भय के आधार पर किये जा रहे पलायन से रोकना होगा, यह न उनके हित मे है न हिन्दुओं के हित मे, यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है, इसे समाप्त करना ही होगा।

वर्तमान सरकार भी हिन्दुओं और तथाकथित पिछड़े वर्गों के मध्य भेदभाव और दुर्भावना को बढाने का काम ही कर रही है आरक्षण के समर्थन और एससी एसटी बिल को समर्थन देकर एक दुर्भाग्य पूर्ण स्थिति और बात को और ख़राब स्थिति तक पहुंचा दिया है। 

पिछड़े वर्ग के लोग इस देश  केअवसरवादी नेताओं और राष्ट्र के शत्रु कांग्रेस पार्टी के लिए अच्छा हथियार है मुस्लिमों की तरह वो इसे देश को कमज़ोर और वर्ग संघर्ष को गहरा करने के लिए इस्तेमाल करेंगे, कर रहे है पिछले 70 वर्षों से, लोगों को इस साज़िश को समझना होगा और इस दुर्भाग्यपूर्ण बिल और इसके दुष्परिणामों से मुक्त होना होगा।

अब समय आ गया है की हिन्दू अपनी उदारता और सहिष्णुता का चोला उतार फेंके वरना उनका अस्तित्व नष्ट हो जायेगा, आज हिन्दू अपने ही राष्ट्र मे हाशिये पर रख दिया गया है स्वतंत्रता के समय से ही इस राष्ट्र के निर्माताओं और तथाकथित जनता के सेवकों ने ही हिन्दुओं के साथ महान छल किया शुरू से लेकर आजतक कायम है।

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यदि अब हिन्दू नहीं जागा तो तो इस देश की ८०% आबादी हिन्दू होने के बावजूद उनके हक और हितों की कोई सुनवाई नहीं है, यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण घटना है और इसकी जड़ मे हिन्दुओं की तथाकथित सहिष्णुता और उदारता ही है जो परम कायरता और पलायनवादिता मे परिवर्तित हो गयी है।

५०% हिन्दू तो कम्युनिस्ट विचारधारा और कांग्रेस के प्रभाव मे नाम मात्र के हिन्दू रह गए है, वो अघोषित रूप से गुलाम हैं कांग्रेस और कम्युनिस्ट विचारधारा के अपने निहित स्वार्थों और आत्महीनता की वजह से।

विदेशी दासता और कांग्रेस और कम्युनिस्टो के प्रभाव मे वो अपनी महान सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत से पूरी तरह कट गए हैं, वो बेहद गहरे नशे और मूर्छा मे है, वो किसी भी तरह से इस राष्ट्र के लिए किसी भी तरह उपयोगी नहीं रहे हैं।

बाकी बचे जात पात और उंच नीच मे बंटे हुए हैं, १२०० साल पहले भी विदेशी आक्रान्ता इसलिए सफल हुए और आज भी यह दूषित और विषैली मानसिकता और उददेश्य से भरे लोग इसलिए सफल हो रहे हैं क्यूंकि हिन्दू, अपनी कमजोरियों और नपुंसकता की वजह से पहले भी मार खाया और आज भी खा रहा है और खाता रहेगा यदि समय रहते जागरूक और एकजुट नहीं हुआ तो।

हिन्दुओं ने अपनी भलमनसाहत और मूर्खता की भयानक कीमत पहले भी चुकाई है और आज भी चूका रहे हैं, यदि वो इस भ्रम और मूर्खता से नहीं उबरे तो उनका विनाश तय है, इस देश मे पूर्ववर्ती और वर्तमान सरकारें वोट बैंक और खुशामद की राजनीति से बाहर नहीं आ सकी है, सत्ता मे बने रहने का लालच उन्हें न्यायपूर्ण और निष्पक्ष भाव से कार्य करने योग्य नहीं होने दी रहा है।

हिन्दुओं को अपनी मदद स्वयं करनी पड़ेगी उनका कोई भी मददगार न पहले था न अब है उनके अपने सिवा, यही समय और परिस्थिति की मांग और चेतावनी है, समय रहते एक होकर इस अन्याय और नीचता का सामना नहीं किया गया तो हमे अपने ही देश मे अल्पसंख्यक होकर हर किस्म की गुलामी, आतंक और अत्याचार झेलने से कोई नहीं बचा पायेगा।

जागो हे अमृत के पुत्रों जागो, क्लीव और कायर बनकर मत बैठे रहो, तुम्हारी सहायता करने कोई नहीं आएगा, जागो इसके पहले की बहुत देर हो जाए।

 

जय भारत, जय माँ भारती

यह प्रश्न मेरे ब्लॉग एवं Quora के प्रबुध्द पाठक द्वारा पूछा गया है 

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