क्या बिना शारीरिक सम्बन्ध बनाये जीवन व्यतीत करना संभव है?

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क्या बिना शारीरिक सम्बन्ध बनाये जीवन व्यतीत करना संभव है?

क्या बिना शारीरिक सम्बन्ध बनाये जीवन व्यतीत करना संभव है? यह सवाल मुझसे एक Quora मित्र ने पूछा है। हाँ, बिल्कुल संभव है, यह नेक काम मैं कर रहा हूँ, इतने वर्षों से, प्रकृति ने हमें प्रजनन की शक्ति प्रदान की है, इसके लिए अंग और शारीरिक व्यवस्था प्रदान की है, यह क्षमता और प्रवृत्ति हम मे और सभी जीवधारियों में एक समान है।

सभी अन्य जीव और अधिकांश मनुष्य इसे अपनी प्रकृति प्रदत्त प्रवृत्ति के आधीन यंत्रवत कार्य करते हैं, उनका इस पर कोई भी जोर नहीं है, एक उम्र और समय विशेष में उनके अंदर कामवासना का संचार होता है और वो अपने नर या मादा साथी के साथ शारीरिक रूप से संयुक्त होते हैं और प्रजनन करते हैं, यह एक अनिवार्य घटक के रूप में सभी जीवधारियों में संपन्न किया जाता है, अपनी प्रजाति को निरंतर बनाये रखने और इसमें वृद्धि करने के लिए यह प्रकृति प्रदत्त विधान है और मनुष्य सहित सभी जीवधारी इसके आधीन है।

मनुष्यों और अन्य जीवधारियों में एक बुनियादी भेद हैं इस सम्बन्ध में, मनुष्य इस प्रकृति प्रदत्त प्रवृत्ति के आधीन रहने को बाध्य नहीं है वह विशिष्ट साधनाओं और योगिक प्रक्रियाओं का उपयोग करके इस शारीरिक बाध्यता/आवश्यकता से परे जा सकता है इससे मुक्त हो सकता है, लेकिन यह सभी के लिए साधारण रूप से साध्य नहीं है, उनकी कमज़ोर इच्छा शक्ति और विशिष्ट मार्ग पर चलने के प्रति अनिच्छा के कारण, लेकिन यह हर किसी के लिए संभव नहीं हो पाता है।

क्या बिना शारीरिक सम्बन्ध बनाये जीवन व्यतीत करना संभव है?

विवाह और गहरी आत्मीयता पूर्ण सम्बन्ध 

प्रश्नकर्ता के प्रश्न का उत्तर यह है की मनुष्यों द्वारा इसे साधने या इससे मुक्त होने के दो ही तरीके हैं – पहला जो लगभग सभी लोगों द्वारा इस्तेमाल किया जाता है, विवाह, एक उम्र के बाद जब आप के अंदर काम वासना प्रबल हो जाये और आप इसके वेग सम्हालने में समर्थ न हो पायें आप एक प्रेमपूर्ण बंधन में विवाह में संयुक्त हो जाइये और इस उर्जा का वैधानिक और युक्तियुक्त तरीके के नियोजन, नियमन और विसर्जन कर लें, अब आप कहेंगे इसमें तो बंधन और शारीरिक सम्बन्ध दोनों से गुजरना पड़ेगा।

विवाह संस्था का अविष्कार मनुष्य की इसी आवश्यकता के नियमन और और उसे एक व्यवस्थित और विधायक रूप प्रदान करने के लिए ही किया गया था, जो आज भी सबसे बेहतर व्यवस्था और उपाय है, प्रकृति प्रदत्त बाध्यता और शक्ति के नियमन, नियोजन और व्यस्थापन का, यह सार्वभोमिक और सर्व स्वीकृत व्यवस्था है पूरे विश्व में और सभी संस्कृतियों में।

निश्चित ही आपको इससे गुजरना पड़ेगा, लेकिन यदि आप अपने साथी के साथ एक बेहद मित्रतापूर्ण और आत्मीय सम्बन्ध निर्मित कर लें तो यह काम के विसर्जन में बेहद सहायक हो सकता है स्त्री और पुरुष दोनों के लिए, वो इसे एक दुसरे के प्रति बेहद आदर और प्रेम के साथ एक गहरी मित्रता में रूपांतरित कर सकते हैं जहाँ काम का प्रभाव और प्रबलता न्तयूनम हो जायेगी।

इस तरह एक समय के पश्चात् शारीरिक सम्बन्धों के प्रति बहुत आकर्षण और प्रबलता नहीं रहेगी, यदि उनके मध्य गहरे आत्मीय और भावनात्मक प्रगाढ़ता विकसित हो जाये ,और वो एक दुसरे को महज लिंग के आधार पर नहीं एक व्यक्ति के रूप में प्रेम और मित्रता पूर्ण सम्बन्ध विकसित कर सकने में सफल हो जाएँ, यह बेहद आसान और सबसे सुविधाजनक तरीका है, इस धरती पर बहुसंख्यक लोगों के लिए, संतान की प्राप्ति और उनके पालन पोषण की व्यस्तता भी उनके अंदर कामवासना की प्रबलता को क्षीण कर देती है।

बहुत सारे दम्पत्तियों में संतान के जन्म के पश्चात् जब वो माता और पिता बन जाते हैं, काम में रस और उसकी प्रबलता क्षीण हो जाते हैं, और यदि पुरुष स्त्री में मातृत्व को गहराई से देखने लगे तो उसकी काम में रूचि विलीन हो जाती है और वह स्त्री मात्र में माँ को देखता है, अपनी पत्नी और सभी स्त्रियों में, यह संभव है यदि आप आत्मीय, भावनात्मक और वैचारिक रूप से परिपक्व और गहरे हो जाएँ तो यह सहजता से घटित होता है।

चुनौतियाँ और उपाय 

यह बहुत लोगों का सवाल और समस्या है, लेकिन शरीर का अपना नियम है, वह पुनरुत्पादन करना चाहता है, प्रकृति अपना काम करती है,  शरीर के हॉर्मोन तो जोर मारते ही रहेंगे और आपको उसके लिए प्रेरित और बाध्य करते रहेंगे, काम सर्वाधिक शक्तिशाली ऊर्जा है और इसका वेग अनियंत्रित और असाधारण होता है, इसका दमन उचित नहीं है।

काम को दबाना संभव नहीं है और यह स्वस्थ बात भी नहीं है, और ऐसा करने पर यह 24 घंटे आप पर हावी होकर आपसे कोई भी अनर्थ करवा सकता है, पुरुषों के लिए यह बेहद मुश्किल है, क्योंकि उनका काम आक्रामक होता है, वह हिंसा, क्रोध, और अन्य ज्यादा बुरे तरीकों से अभिव्यक्ति और विसर्जन के मार्ग खोजेगा।

स्त्रियों के लिए ये आसान होता है, पुरुषों के लिए बहुत मुश्किल होता है, बेहतर है आप किसी के साथ स्वस्थ, प्रेमपूर्ण संबंध और एक संतुलित और वैधानिक रिश्ते में हों, तो इसका नियमन बेहद सरल और सुविधा जनक हो सकता है।

अधिकांश लोगों के लिए साथ या विवाह करना ज्यादा आसान होता है, क्योंकि यह विपरीत ऊर्जाओं के मध्य संतुलन स्थापित करने में और विसर्जन करने एवं उचित नियोजन में सहयोगी होता है।

यदि आप इसे देख , समझ और नियमित कर सकते हैं तो अच्छा है वरना यह आपको मानसिक , शारीरिक रूप से विकृत, कुंठित और बीमार बना सकता है। हमारी संस्कृति में इसके लिए विवाह का विधान कर रखा है, आप विवाह और आत्मीय प्रेम संबंधों द्वारा इसे बेहद सरलता और सहजता से नियमित कर सकते हैं।

विवाह और स्त्रियों का स्नेह और प्रेम इसमें मददगार है 

यह समस्या पुरुषों के साथ ज्यादा होती है, क्यूंकि स्त्रियाँ आसानी से जीवन भर बिना शारीरक सम्बन्ध बनाये रह सकती हैं, बिना कुंठा और विकार के, उनकी प्रकृति ग्राहक है और पुरुषों की आक्रामक, अतः यह उनके लिए ही सबसे बड़ी समस्या है या उन स्त्रियों में जिनके पास शरीर तो स्त्रियों का है लेकिन वो पुरुषों की तरह आक्रामक और बेहद महत्वकांक्षी हैं, दुसरे अर्थों में पुरुष प्रधान प्रवृत्तियों के आधीन हैं और शासन करने की प्रवृत्ति रखती हैं।

पुरुषों के लिए इस सम्बन्ध में स्त्रियों का प्रेमपूर्ण और स्नेहपूर्ण साथ भी आपको अपनी काम उर्जा को नियमित और संतुलित रखने में सर्वाधिक उपयोगी होता है, मुझे काम कभी भी नहीं सताता जब मैं स्त्रियों के मध्य होता हूँ या उनके संपर्क में रहता हूँ, स्त्रियों का साथ और स्नेह आपकी उर्जा के वर्तुल को पूर्ण कर देता है और आप शांत और स्थिर महसूस करते हैं।

मेरी ढेरों बहने, बेटियां और महिलाएं मित्र है, जिन्हें मैं अपने परिवार की सदस्य की तरह प्रेम और स्नेह पाता और प्रदान करता हूँ, यह भी इसमें बेहद मददगार है, उनका पवित्र स्नेह आपके सभी विकारों को नियमित और संतुलित करने में सहयोगी है।

स्त्रियां प्रेम और आत्मीय संबंध ज्यादा पसंद करती हैं, बनिस्पत शारीरिक संबंधों के, जब तक उन्हें संतानोत्पत्ति की चाहत या अपने से जुड़े पुरुष को खुश और सन्तुष्ट करने की बाध्यता और आवश्यकता न हो, उनका प्रेम और सहयोग पाते रहने के लिए।

अतः मेरा अनुभव यह है की उनका साथ और उनके प्रति स्नेहपूर्ण और पवित्र सोच ही आपके लिए इसे बेहद आसान बना देती है, उनके लिए कामवासना कभी भी प्राथमिक बात नहीं होती, वे मित्रतापूर्ण दुलार, देखभाल, सुरक्षा और आत्मीयता की तलाश में होती हैं, इसमें, प्रेम और पवित्रता ही सब कुछ संभव कर सकते हैं।

विवाह एक अच्छा तरीका है इसे नियमित और संयोजित करने का, कोई भी गहरा प्रेमपूर्ण सम्बन्ध व्यक्तियों या सम्पूर्ण अस्तित्व से आपको इसमें मददगार हो सकता है।

क्या बिना शारीरिक सम्बन्ध बनाये जीवन व्यतीत करना संभव है?

प्रेम और गहन आत्मिक प्रेम सबसे शक्तिशाली उपाय है इस सम्बन्ध में 

सिर्फ गहन प्रेम ही आपको काम से मुक्त कर सकता है, और कोई भी तरीका नहीं है, अब यह प्रेम किसी व्यक्ति से हो अपनी कला, या काम से या सम्पूर्ण जगत के पालनहार के प्रति, प्रेम सबसे बड़ी कीमिया है, आत्मरूपान्तरण के लिए।

गौर कीजिए , आप अपनी मां, बहन और बेटी, यहाँ तक कि जब आप अपनी पत्नी के भी मातृ स्वरूप को उसके स्त्री शरीर होने से ज्यादा मूल्य देने लगते हैं, तब आप की कामुकता विलीन हो जाती है, यही सभी स्त्रियों के लिए काम करता है, आपको सिर्फ अपनी अप्रोच और दृष्टि बदलनी है।

उनके साथ यह सवाल क्यों खड़ा नहीं होता, क्योंकि आपका उनसे जुड़ाव बेहद भावनात्मक और हार्दिक है, वह शरीर के तल पर नहीं है, आप उन्हें गले भी लगाते हैं, उनका माथा भी चूमते हैं, उन्हें अपनी गोदी में भी बिठाते हैं, उनकी सेवा करते हैं, क्या यह सब किसी तरह बाधक है, आपके जीवन में और काममुक्त जीवन जीने में?

गहरी आत्मीयता और प्रेम आपको उदात्त बनाता है और विकार मुक्त करता है, फिर आपकी बायोलॉजी आपके दिल, दिमाग और शरीर का संचालन नहीं कर पाती है, आपके लिए अपने आपको सम्हालना बहुत आसान हो जाता है।

क्योंकि आपकी भावना उनके प्रति कामना मुक्त है, आप उन्हें विपरीत लिंग के होने के बावजूद उनकी मौजूदगी में उनके साथ बिना विकार के रहते हैं, यह आप समस्त स्त्री, पुरुषों के लिए विकसित कर सकते हैं, फिर कोई भी समस्या नहीं रहेगी, न आपको न उन्हें।

प्रेम और आत्मीयता से भरे व्यक्ति में काम का वेग, करुणा और प्रेम के रूप में रूपांतरित होता रहता है, बहुत रचनात्मक कार्यों में लगे व्यक्तियों की काम ऊर्जा भी उनके रचनात्मक कार्यों के माध्यम से विसर्जित हो जाती है।

सभी को ऐसा एक द्वार निर्मित करना ही होगा, जिससे वो बिना किसी को हानि पहुंचाए गुणात्मक प्रभाव उत्पन्न करने का जरिया बन जाये, इसके लिए आपको उसे समझना और रूपांतरित करना सीखना होगा, उसका सही नियोजन सीखना होगा।

हमारी समस्त ऊर्जा काम की ऊर्जा ही है, इससे जो चाहे उत्पन्न करवा लो, बच्चे या इस दुनिया के श्रेष्ठतम रचनाएं, कला, अविष्कार, उपलब्धियां सब कुछ काम ऊर्जा का ही सकारात्मक और रचनात्मक प्रतिफलन और नियोजन है।

Which is better - yoga or gym?

काम और आध्यात्मिक प्रक्रियायें, साधनाएं, योग और ध्यान 

आध्यात्मिक साधनाएं आपको इसे नियमित और संतुलित करने में सहयोगी हो सकती है, इसके अलावा आपको पर्याप्त शारीरिक श्रम, खेल आदि का सहयोग लेना होगा अपनी ऊर्जा को दिशा देने के लिए, वरना दमित काम आपको विकृत और नष्ट कर देगा।

योग साधनाएं इसमें बेहद सहयोगी हैं, प्राणायाम और स्वांस संबंधी योगिक क्रियाएं ऊर्जा के ऊर्ध्वगमन में सहयोगी होती है, काम सबसे निचले तल पर कार्य करता है, और प्रेम और करुणा ऊंचे तलों पर, बस इसे नीचे से ऊपर ले जाना है।

योग्य गुरु के सहयोग से इसे सीखा जा सकता है, और काम ऊर्जा के उपद्रवों को नियमित किया जा सकता है, उसके सर्वाधिक कल्याणकारी उपयोग के लिए।

इससे आप एक आंतरिक स्वतंत्रता और विजय अपने मनोशारीरिक सिस्टम पर पा लेते हैं, और वहां फिर सबकुछ आपकी मर्जी से संचालित होता है, आपके मन और शरीर आपके निर्देशों का पालन करते है, आप उनके द्वारा उत्पन्न उद्वेगों और आवेगों का अनुकरण करने के लिए बाध्य नहीं होते हैं, आप उनके प्रभाव से मुक्त होते हैं।

काम उर्जा के दमन के दुष्परिणाम 

काम की निंदा और दमन के कारण सारे तथाकथित महात्मा, मौलवी, पादरी और सामान्य जन इसके कारण पथभ्रष्ट, व्यभिचारी हो जाते हैं और अपनी अनियंत्रित कामुकता के कारण अमानवीय एवं नृशंसतम आपराधिक कार्यों को करने के लिए बाध्य होते हैं।

आप सभी रोज़ अखबार और टीवी में समाचार सुनते और देखते होंगे बलात्कार, छेड़छाड़, यौन  हिंसा से सम्बंधित ख़बरों की, यह सब काम के दमन और उसके उचित तरीके से विसर्जन और नियोजन की शक्ति न होने का परिणाम है।

आज हजारों तरीके से लोगों की उत्तेजना और कामुकता को भड़काने वाली बातें, चित्र, किताबें, चलचित्र और तमाम किस्म के उपाय सभी संचार और सूचना माध्यमों पर उपलब्ध हैं , इसलिए लोगों के लिए बिना शारीरिक सम्बन्ध बनाये या बिना सेक्स में उतरे स्वस्थ और शांत रहना संभव नहीं हो पाता है। 

आप सभी तो जानते ही होंगे हमारे महात्मा गांधी ने इसे साधने के लिए क्या क्या उपाय किये और बेहद निंदा के पात्र बने, यह इसमें कितने सफल हुए यह तो उनको ही पता होगा और ऐसा हमारे सभी तथाकथित महात्माओं, मौलवियों और पादरियों के साथ हो रहा है।

इन्द्रियां और शरीर के हार्मोन किसी भी प्रवचन या धार्मिक किताब की नहीं सुनते वो बस अपना काम करते हैं, यदि आपने स्वयं को अपनी पशु प्रवृत्तियों से ऊपर उठाने के लिए कोई भी प्रयास नहीं किया है तो यह आपसे अनर्थ करवा के रहेंगी या फिर आप इससे बेहद पीड़ित और प्रताड़ित रहेंगे, इसके अप्राकृतिक दमन के कारण।

काम का दमन आपको कुंठित, विकृत और व्यभिचारी और परवर्ट बना देगी, इसका नियमन सर्वाधिक महत्वपूर्ण कार्य है और प्रेम पूर्ण संबंध निर्मित करना इसका सबसे आसान रास्ता है।

क्या बिना शारीरिक सम्बन्ध बनाये जीवन व्यतीत करना संभव है?

अंतिम सुझाव 

यदि आप पुरुष हैं तो समस्त स्त्रियों में मातृत्व और मातृ शक्तियों को देखिए, उनके साथ मित्रतापूर्ण संबंध निर्मित कीजिये, खुद को और उनको सिर्फ यौन की दृष्टि से मत देखिए और सोचिए।

अपना आहार विहार और दिनचर्या ऐसी रखिये जो उत्तेजना पैदा करनेवाली वस्तुओं, भोजन और व्यक्तियों और अन्य सूचना और सामग्री से मुक्त हो, और आपको अपने शरीर और मन के परे के आयामों की खोज में प्रवृत करनेवाले हों।

हम सभी सिर्फ हमारे यौनांग नहीं है, हम इससे परे एक बृहत्तर आयाम और अस्तित्व हैं, इसकी खोज और अनुभूति की दिशा में कार्य कीजिये, नियमित, प्राणायाम और शारीरिक श्रम कीजिये, बच्चों के साथ खेलिए और अपने मन और शरीर को निर्दोष रखिये।

देखिये आपके लिए क्या सुविधाजनक और सहयोगी हो सकता है, काम का उचित नियमन और नियोजन संभव है, दमन नहीं, यह आपको बेहद मुश्किलों में डाल देगा, सिर्फ गहरे आत्मीय और भावनात्मक संबंध निर्मित करके आप, बिना शारीरिक संबंध बनाए स्वस्थ और प्रसन्न जीवन जी सकते हैं।

धन्यवाद

Quora पर 1,50,000 से अधिक बार पढ़ा गया एवं 1100 से अधिक अपवोट प्राप्त किये हैं —-यह जारी है 

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4 comments

    1. Thanks for your kind words, we are trying to deliver the best, if you have any query please feel free to write to us, please subscribe to get all new blog posts in your inbox.

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