क्याअहंकार व्यक्ति के पतन का एक प्रमुख कारण होता है?

क्या अहंकार व्यक्ति के पतन का एक प्रमुख कारण होता है?

Print Friendly, PDF & Email

Quora के मेरे एक पाठक ने पूछा है, क्या अहंकार व्यक्ति के पतन का एक प्रमुख कारण होता है? मेरा पूरा जीवन यह देखते, समझते ही बीता है, मैंने जीवन भर लोगों को उनकी मूर्खता, कमजोरियों और अहंकार की वजह से पतित और समूल नष्ट होते हुए देखा है। 

यह मेरे जीवन के सबसे गहरे अनुभव में से एक है, सफलता, शक्ति, ऐश्वर्य, सत्ता का मूल्य तभी है जब वो सभी के कल्याण के लिए प्रयुक्त हो जब यह सिर्फ अपनी अंधी स्वार्थ सिद्धि और महिमामंडन करने और दूषित अहंकार को मजबूत करने और स्वयं को दूसरों पर आरोपित करने के लिए उपयोग में आने लगे तो सर्वनाश का कारण बनते है अपने भी और दूसरों के भी।
अहंकार की कथा 

इतिहास तो भरा है ऐसे कथानक, घटनाओं और पात्रों से, रावण, कंस, दुर्योधन, वर्तमान में ब्रिटिश, कांग्रेस, अन्य राजनितिक दल और राजनेता,  हिटलर, मुसोलिनी, स्टालिन, चर्चिल, क्रूर शासक, अभिमानी व्यक्ति और राजनीतिज्ञ, सभी विनाश को प्राप्त हुए सिर्फ अपने अहंकार और दूषित अहमन्यता की वजह से, आप इस असीमित ब्रम्हांड में कोई भी अस्तित्व नहीं रखते हैं, इतना विराट है यह।

और आप यहाँ किस बात का अहंकार कर सकते हैं किसी भी पल आपका अस्तित्व मिट सकता है, सदगुरु कबीर साहब ने कहा है “पानी केरा बुद बुदा अस मानुष की जात, देखत ही छिप जायेगा ज्यूँ तारा परभात” अर्थात  मनुष्य का जीवन पानी के बुलबुलों की तरह है, यह कभी भी नष्ट या लुप्त हो सकता है, जैसे सुबह होने पर रात को जगमगाने वाले सभी तारे लुप्त हो जाते हैं।

एक सर्वे के अनुसार पृथ्वी पर प्रतिदिन 2.5 लाख लोग रात्रि को सोने के बाद दुसरे दिन का सूरज नहीं देख पाते और यह हममें से कोई भी हो सकता है, हम अपने जन्म के पश्चात् से हर पल मौत की ओर गति कर रहें हैं, यह साँसों की डोर कभी भी टूट सकती है, फिर किस बात का गुमान और क्यूँ ?

हमें इस सत्य को सदैव याद रखते हुए जीना चाहिए, की कोई भी पल हमारा अंतिम पल हो सकता है, यही जीवन का स्वभाव और हमारे जीवन की सबसे बड़ी सच्चाई है,  फिर हम किसी भी मूर्खतापूर्ण बात या अहंकार को धारण करते हुए अपना और दूसरों का जीवन नष्ट करने का कोई भी यत्न नहीं कर पाएंगे।

 क्याअहंकार व्यक्ति के पतन का एक प्रमुख कारण होता है?

अहंकार यह सबसे बड़ा मनोरोग और मनोविकार है जो मनुष्य के स्वयं के लिए और उसके समूचे वातावरण के लिए दुखदाई और विनाशकारी सिद्ध होता है, यह एक पागलपन है, आत्मघाती है।

अहंकार व्यक्ति के सोचने समझने कि शक्ति हर लेता है, उसे किसी का सच्चा सुझाव और सत्य दिखाई नहीं देता, वो अंधी जिद और शक्ति के नशे में विनाशकारी बातों और कार्यों की और आकर्षित होकर नष्ट हो जाते हैं, इतिहास गवाह है और ऐसे सैकड़ों उदाहरण भरे हुए हैं पौराणिक काल से आधुनिक काल तक।

ऐसे लोगों के लिए उनकी सोच, समझ, अनुभव, जीने और कार्य करने का तरीका ही सब कुछ होता है, उनके अनुभव और समझ के आगे किसी भी कितनी भी अच्छी और ऊंची बात का कोई भी मोल नहीं होता, चाहे कोई भी उन्हें बताए या समझाए।

उनके जीवन में सिर्फ उनकी व्यक्तिगत चाहतों, वासनाओं और महत्वकांक्षाओं की पूर्ति का ही महत्व रह जाता है, जिसके लिए वो सबकुछ बलि पर चढ़ा सकते है, दूसरों का भी, स्वयं का भी, यह दूर्बुद्धि और मूर्खता का चरम है।

मेरा व्यक्तिगत अनुभव अहंकारियों के साथ 

मेरे जीवन में व्यक्तिगत रूप से ऐसे व्यक्तियों और संस्थानों से मेरा वास्ता पड़ा है, घर परिवार में भी और बाहर संसार में भी,  मैंने उन सभी बड़े, समझदार, बुद्धिमान और बेहद सफल और शक्तिशाली लोगों को उनकी गलत नीतियों और कार्य करने के अस्वस्थ और मनमाने तरीके के बारे में चेताया और उसे परिवर्तित करने के सुझाव और सलाह दी।

उन्होंने मुझे उम्र में छोटा, अनुभवहीन और साधारण और बेकार समझकर मेरा और मेरी बातों का तिरस्कार किया और मुझे अपना साथ छोड़ने के लिए बाध्य किया, मुझे कोई भी परेशानी नहीं हुई, मैंने हर संभव कोशिश की, उन्हें उनकी मूर्खताओं और लापरवाही और अहंकार प्रेरित सोच और कार्य करने की शैली के आगामी दुष्परिणामों के प्रति जागरूक और सचेत कर सकूँ, लेकिन उन्हें अपने पद, सत्ता और सफलता का नशा इस कदर चढ़ा हुआ था की उन्होंने मेरी हर बात की अनदेखी और उपेक्षा की।

अब सचाई और समझदारी का दामन छोड़ने की कीमत तो चुकानी ही पढ़ती है, जो इन महानुभावों के साथ भी घटित हुआ, इन्हें बेहद नुकसान, अपयश,  विवाद, और दुसरे उपद्रवों और बड़े आर्थिक नुकसान से गुजरना पड़ा, कुछ तो सदा के लिए समाप्त हो गये, उनका कई दशकों का व्यापारिक साम्राज्य और गुडविल ताश के पत्तों की तरह कुछ ही समय में धराशायी हो गई।

मै तो खुशी खुशी हट गया, एक छोटे मामूली आदमी को क्या फर्क पड़ता है, कहीं भी रहे, मजे में रहेगा, लेकिन उनमें से कुछ का नामोनिशान मिट गया कुछ ही समय में, जबकि वो अपने क्षेत्र के दिग्गज थे और कई दशकों से बाजार और अपने क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ और अग्रणी उद्यमी और संस्थान थे, वो फिर दोबारा कभी उठ नहीं सके।

 क्याअहंकार व्यक्ति के पतन का एक प्रमुख कारण होता है?

अहंकार के दुष्परिणाम 

दुर्मति और दुर्गति का चोली दामन का साथ है, जहां एक होगी दूसरी भी दिखाई पड़ेगी यह जुड़वा बहन है, इसलिए जहां दुर्मति मौजूद है दुर्गति होकर रहेगी, और अहंकार और दुर्मति सगे भाई बहन है, जो विनाश की कोख से उत्पन्न होते हैं।

मैंने बेहद समझदार और सफल लोगों को इस का शिकार होकर नष्ट होते देखा है, लोग अपनी सफलता और शक्ति के बोझ के नीचे दबकर मर जाते है, लोग हज़म नहीं कर पाते और उनकी शक्ति और सफलता ही उनके विनाश का कारण बन जाते है।

सफलता और शक्ति के मद में अंधे लोग बेहद गलत एवम् अनर्थकारी बातों, कामों और हरकतों और संगत के आदी हो जाते है, जो उनकी जीवन भर की मेहनत, पराक्रम और कुशलता को लील जाते है, अहंकारी व्यक्ति की सारी शक्ति, धन और बुद्धि स्वयं उसके और उसके संपर्क में रहने वाले सभी व्यक्तियों के विनाश का कारण बन जाती है, और वो खुद अपने विनाश को आमंत्रित और अंगीकार करते हैं, अब क्या कहा जाये ऐसे लोगों के सम्बन्ध में।
कहानी का निष्कर्ष 
मेरे अनुभव और मनुष्यता का इतिहास इस बात के गवाह हैं की अहंकार एक अंधा कुआं है जो इसमें गिरा फिर कभी बाहर नहीं आता, उसकी खबर बस आती है, हा हा हा।

एक बात मुझे कभी भी समझ में नहीं आई, क्यों और किसलिए? और किस बात का अहंकार? यहां एक से एक बढ़कर लोग हुए है और होते रहेंगे, उनमें से किसी का भी नामो निशान नहीं है ना उन्हें कोई याद करनेवाला है यहाँ।

स्वयं को सबसे श्रेष्ठ समझना और इस अहंकार में अंधे होकर सभी दूसरी बातों, लोगों, सच्चाइयों और खतरों, प्रतिद्वंदियों को नजरंदाज करना व्यक्ति को गहरी मुसीबत में डालता है। इन्सान को सदैव  याद रखना चाहिए की उसे बहुत विकसित होना है, जो भी उसने पा लिया उससे आगे के और भी  बेहतर आयाम हैं और हमसे बहुत बेहतर और श्रेष्ठ लोग अप्रकाशित और अनजान हैं, जो अपनी क्षमता और योग्यता का उपयोग अपने और सभी के जीवन के लिए  करते हुए बिना किसी अहंकार और श्रेष्ठता के दावे के बेहद साधारण और मामूली जीवन जी रहे हैं।

हमें सदैव अपने से ज्यादा योग्य और समर्थ व्यक्तियों को  ढूँढना और उनसे सीखना चाहिए, शक्ति, सत्ता, धन और पद यदि आपको विनम्र और शालीन नहीं बनाते तो यह दुर्भाग्य ही साबित होकर रहेंगे, ऐसा ही हुआ है सदा से, पूरी दुनिया में इसके लाखों उदहारण हैं, फलों और फूलों से लदा हुआ वृक्ष सदैव झुका हुआ और छायादार होता है। 

अहंकार का सिर्फ इतना उपयोग है की यह आपको आपके होने के एहसास से भर सके, इस दुनिया में आपके वजूद  को कायम रखने में सहयोगी हो सके, लेकिन जब यह अपनी सीमायें लांघ कर दूसरों पर खुद की इच्छाओं, प्रभुत्व और स्वामित्व को थोपने की आकांक्षा से भर जाता है तब यह उस व्यक्ति के सर्वनाश का कारण बनता है।

अहंकार, सीमित मात्रा में अपनी क्षमता और योग्यता के प्रति आत्म विश्वास के रूप में अपने सामाजिक व्यक्तित्व और अस्तित्व के निर्माण और प्रस्तुति के लिए उपयोगी है,  इस दुनिया में जीने, अपना व्यक्तित्व और स्थान बनाने, अपनी पहचान बनाने के लिए उपयोगी है, लेकिन इसे हमारे सर पर चढ़ कर डांस नहीं करने देना चाहिए, वर्ना अनर्थ की शुरुआत हो जाती है,  इससे ज्यादा यह एक बीमारी के रूप में सबकुछ नष्ट कर देता है

धन्यवाद।

Spread the love
  • 1
    Share

2 comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *