क्या हिन्दू वाकई खतरे में हैं?

क्या हिन्दू वास्तव में खतरे में हैं?

क्या हिन्दू वास्तव में खतरे में हैं? निश्चय ही, इस धरती पर वो सभी लोग खतरे मे हैं जो अपनी मूर्खता, लापरवाही, कायरता, अहंकार और झूठी मान्यताओं और अन्धविश्वास से बाहर निकलने के लिए, उसे देखने और दूर करने के लिए तैयार नहीं है, और यह सब बातें दुनिया के सभी समुदाय और इस देश के हिन्दू समुदाय के लोगो के लिए भी पूरी तरह सत्य है। हिन्दुओं ने अपनी १००० साल की गुलामी से कुछ नहीं सीखा, वो आज भी मूर्खतापूर्ण बातों, अहंकारग्रस्त, असंगठित हैं, अंधेपन, जाती गत भेदभाव और ऊंचनीच की बीमारी से पीड़ित हैं। यह सब बातें[…]

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क्या मैं अपनी कामुकता को नियंत्रित कर सकता हूं?

क्या मै अपनी कामुकता को नियंत्रित कर सकता हूँ?

क्या मैं अपनी कामुकता को नियंत्रित कर सकता हूं? अवश्य, अपने आप को बेहतर संगति और रचनात्मक कार्यों और बातों में व्यस्त रखकर, व्यायाम, सात्विक भोजन, योग और प्राणायाम भी इसमें आपकी मदद कर सकते है। आपको काम वासना के उद्गम और स्वाभाव को समझना होगा, यह मनुष्य की सबसे प्रबल और और अदम्य ऊर्जा है। अधिक जानकारी और समझ के लिए ओशो की पुस्तक संभोग से समाधि तक पढ़िए यह आपकी समझ और काम ऊर्जा के उचित नियोजन में आपकी मदद करेगी। सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने भी इस सम्बन्ध मे जानकारी दी है, जिससे आपको मदद मिल सकती है।[…]

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गुरू बिना गति नहीं, क्या यह सत्य है?

गुरू बिना गति नहीं, क्या यह सत्य है? मै इस कथन से पूर्णतया सहमत हूं, मनुष्य एक मात्र ऐसा प्राणी है जिसे जन्म से लेकर मृत्यु तक जीवन और जगत के संबंध में सब कुछ जानना और सीखना होता है, इसके बिना हम बेहतर जीवन जीने लायक नहीं बन सकते और ना ही करने योग्य और ना करने योग्य का बोध पा सकते है। बिना  योग्य गुरू और उचित जानकारी, समझ और स्पष्ट दृष्टि के हम अपने और दूसरों के लिए समस्याएं और अनचाही बातों और घटनाओं की सृष्टि करके अपना और उनका जीवन कष्टकारी बनाते रहेंगे। हमें सदैव बेहतर[…]

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गुरू को ईश्वर से भी ऊँचा दर्जा क्यों दिया जाता है?

गुरू को ईश्वर से भी ऊँचा स्थान क्यों दिया जाता है?

गुरू को ईश्वर से भी ऊँचा दर्जा क्यों दिया जाता है?  गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु गुरु देवो महेश्वर, गुरु साक्षात् परमं ब्रह्मा तस्मै श्री गुरुवे नम: गुरू को ईश्वर से भी ऊँचा स्थान क्यों दिया जाता है? यह हमारी संस्कृति का मूलमंत्र है, सद्गुरु की कृपा से ही हमे अपने और समस्त के रहस्यों का पता चलता है, वो ही कार्य कारण को समझने की बुद्धि और करने योग्य का विवेक प्रदान करते हैं। वो ही हमारे जीवन को गौरव और सार्थकता के बोध से भरते हैं, वो ही हमसे हमारा परिचय कराते हैं और हममे स्थित समस्त का भी।[…]

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आध्यात्मिकता के कितने प्रकार हैं?

आध्यात्मिकता के कितने प्रकार हैं?

आध्यात्मिकता के कितने प्रकार हैं? आध्यात्मिकता के कितने प्रकार हैं? आध्यात्मिकता का कोई प्रकार नहीं होता है, वो रूप, रंग और आकार प्रकार से मुक्त है, वो कोई वस्तु नहीं है कोई ऐसी चीज़ नहीं है जिसके बारे मे आप कोई परिभाषा गढ़ सकें। आध्यात्मिकता कोई विश्वास या उधार प्राप्त ज्ञान नहीं है यह स्वयं के द्वारा अर्जित आंतरिक बोध की उपलब्धि है, इसका बाह्य उपचारों से कोई भी लेना देना नहीं है, यह स्वयं की खोज और बोध की प्राप्ति की प्रक्रिया है, इसमें विभिन्न साधना पद्धतियाँ उपयोगी है लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात आपकी खोज, संपूर्ण समर्पण, और अपने[…]

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क्या श्रद्धावान व्यक्ति जीवन मे कभी दुखी नहीं होता?

क्या श्रद्धावान व्यक्ति जीवन मे कभी दुखी नहीं होता?

क्या श्रद्धावान व्यक्ति जीवन मे कभी दुखी नहीं होता? क्या श्रद्धावान व्यक्ति जीवन मे कभी दुखी नहीं होता? सुख और दुःख का इस बात से कोई भी अंतर नहीं पड़ता की कोई श्रद्धावान है या अश्रद्धालु, यह व्यक्ति के विचारों और कर्मों पर निर्भर होता है पूर्णतया। बिना अंधरे के रौशनी, बिना भूख के रोटी और बिना दुःख के सुख का कोई भी मूल्य नहीं है, वो एक दुसरे के पूरक और अन्तरंग है, उनका सह अस्तित्व है एक के बगैर दुसरे का कोई वजूद नहीं हो सकता। इसलिए इस बात को भूल जाइये बल्कि सत्य तो यह है की[…]

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