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सही गुरु को कैसे पहचाने?

सही गुरु को कैसे पहचाने? आप कैसे तय कर सकते हैं की वो सच्चे हैं या नहीं? आपके पास कौनसा पैमाना है यह जानने का? यदि आप इतने समझदार और ज्ञानी हैं तो इस झंझट मे क्यों पड़ रहे है की वो सच्चे हैं या झूठ? आप अपना काम कीजिये और उन्हें अपना करने दीजिये। इस धरती पर जितने व्यक्ति है उतने सारे रास्ते हो सकते हैं, सबकी अपनी खोज और उपलब्धियां है, कोई किसी मार्ग से कोई किसी मार्ग और विधि से और कुछ लोग अपने आतंरिक विकास के परिणामस्वरूप बिना किसी कोशिश और बाहरी बात के ज्ञान को[…]

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क्या विज्ञापनों पर भरोसा करना चाहिए?

क्या विज्ञापनों पर भरोसा करना चाहिए?

क्या विज्ञापनों पर भरोसा करना चाहिए? विज्ञापन का उद्देश्य आपको आकर्षित करने और उपभोग के लिए तैयार करने से है, इसके लिए वो हर संभव प्रतीक, भावनाओं और नाटकीयता का प्रयोग करते हैं ताकि उनके उत्पाद की छवि आपके मनस पर अंकित हो जाये और आप चेतन या अचेतन रूप से उन उत्पादों का क्रय और उपभोग करते रहे। इन विज्ञापनों के लिए उत्पादनकर्ता और मार्केटिंग संस्थाएं बेशुमार धन और लोकप्रिय बातों, कथाओं, प्रतीकों और सेलिब्रिटीज की मदद भी लेती है, जिन्हें जनता द्वारा मान्यता या स्वीकृति प्राप्त है। आधुनिक विज्ञापनकर्ता बहुत सारी बातों को अवचेतन रूप से उपभोक्ताओं के[…]

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क्या मैं अपनी कामुकता को नियंत्रित कर सकता हूं?

क्या मै अपनी कामुकता को नियंत्रित कर सकता हूँ?

क्या मैं अपनी कामुकता को नियंत्रित कर सकता हूं? अवश्य, अपने आप को बेहतर संगति और रचनात्मक कार्यों और बातों में व्यस्त रखकर, व्यायाम, सात्विक भोजन, योग और प्राणायाम भी इसमें आपकी मदद कर सकते है। आपको काम वासना के उद्गम और स्वाभाव को समझना होगा, यह मनुष्य की सबसे प्रबल और और अदम्य ऊर्जा है। अधिक जानकारी और समझ के लिए ओशो की पुस्तक संभोग से समाधि तक पढ़िए यह आपकी समझ और काम ऊर्जा के उचित नियोजन में आपकी मदद करेगी। सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने भी इस सम्बन्ध मे जानकारी दी है, जिससे आपको मदद मिल सकती है।[…]

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गुरू बिना गति नहीं, क्या यह सत्य है?

गुरू बिना गति नहीं, क्या यह सत्य है? मै इस कथन से पूर्णतया सहमत हूं, मनुष्य एक मात्र ऐसा प्राणी है जिसे जन्म से लेकर मृत्यु तक जीवन और जगत के संबंध में सब कुछ जानना और सीखना होता है, इसके बिना हम बेहतर जीवन जीने लायक नहीं बन सकते और ना ही करने योग्य और ना करने योग्य का बोध पा सकते है। बिना  योग्य गुरू और उचित जानकारी, समझ और स्पष्ट दृष्टि के हम अपने और दूसरों के लिए समस्याएं और अनचाही बातों और घटनाओं की सृष्टि करके अपना और उनका जीवन कष्टकारी बनाते रहेंगे। हमें सदैव बेहतर[…]

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क्या श्रद्धावान व्यक्ति जीवन मे कभी दुखी नहीं होता?

क्या श्रद्धावान व्यक्ति जीवन मे कभी दुखी नहीं होता?

क्या श्रद्धावान व्यक्ति जीवन मे कभी दुखी नहीं होता? क्या श्रद्धावान व्यक्ति जीवन मे कभी दुखी नहीं होता? सुख और दुःख का इस बात से कोई भी अंतर नहीं पड़ता की कोई श्रद्धावान है या अश्रद्धालु, यह व्यक्ति के विचारों और कर्मों पर निर्भर होता है पूर्णतया। बिना अंधरे के रौशनी, बिना भूख के रोटी और बिना दुःख के सुख का कोई भी मूल्य नहीं है, वो एक दुसरे के पूरक और अन्तरंग है, उनका सह अस्तित्व है एक के बगैर दुसरे का कोई वजूद नहीं हो सकता। इसलिए इस बात को भूल जाइये बल्कि सत्य तो यह है की[…]

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धुम्रपान की आदत कैसे छुड़ाई जा सकती है?

धुम्रपान की आदत कैसे छुड़ाई जा सकती है?

अब आप खुद सोचिये एक सिगरेट आपसे ज्यादा शक्तिशाली है, एक बेहद मूर्खतापूर्ण और नुकसानदायक बुरी आदत और आप उसकी गुलामी से नहीं छूट पा रहे लानत है आप पर।

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