गुरू को ईश्वर से भी ऊँचा दर्जा क्यों दिया जाता है?

गुरू को ईश्वर से भी ऊँचा स्थान क्यों दिया जाता है?

गुरू को ईश्वर से भी ऊँचा दर्जा क्यों दिया जाता है?  गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु गुरु देवो महेश्वर, गुरु साक्षात् परमं ब्रह्मा तस्मै श्री गुरुवे नम: गुरू को ईश्वर से भी ऊँचा स्थान क्यों दिया जाता है? यह हमारी संस्कृति का मूलमंत्र है, सद्गुरु की कृपा से ही हमे अपने और समस्त के रहस्यों का पता चलता है, वो ही कार्य कारण को समझने की बुद्धि और करने योग्य का विवेक प्रदान करते हैं। वो ही हमारे जीवन को गौरव और सार्थकता के बोध से भरते हैं, वो ही हमसे हमारा परिचय कराते हैं और हममे स्थित समस्त का भी।[…]

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क्या श्रद्धावान व्यक्ति जीवन मे कभी दुखी नहीं होता?

क्या श्रद्धावान व्यक्ति जीवन मे कभी दुखी नहीं होता?

क्या श्रद्धावान व्यक्ति जीवन मे कभी दुखी नहीं होता? क्या श्रद्धावान व्यक्ति जीवन मे कभी दुखी नहीं होता? सुख और दुःख का इस बात से कोई भी अंतर नहीं पड़ता की कोई श्रद्धावान है या अश्रद्धालु, यह व्यक्ति के विचारों और कर्मों पर निर्भर होता है पूर्णतया। बिना अंधरे के रौशनी, बिना भूख के रोटी और बिना दुःख के सुख का कोई भी मूल्य नहीं है, वो एक दुसरे के पूरक और अन्तरंग है, उनका सह अस्तित्व है एक के बगैर दुसरे का कोई वजूद नहीं हो सकता। इसलिए इस बात को भूल जाइये बल्कि सत्य तो यह है की[…]

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क्या हिन्दू, दुनिया में सबसे ज्यादा उदारवादी है?

क्या हिन्दू, दुनिया में सबसे ज्यादा उदारवादी है? जी हाँ, और सबसे ज्यादा मूर्ख भी, आप पूरे विश्व का इतिहास देख लीजिये, जितनी दरियादिली और उदारता हिन्दुओं ने दूसरे सभी संप्रदाय और जाति और मूल के लोगो के साथ निभाई है ऐसा और कौन है, यहाँ सभी को समान अधिकार और सम्मान दिया गया है। यहाँ तक के जिन जाति के लोगो ने इस देश पर हमला किया, और सैकड़ों वर्षों तक शासन किया उन्हें भी स्वीकार और अंगीकार किया, बिना किसी भेदभाव के और पक्षपात के बल्कि उन्हें तो यहाँ के मूल निवासियों से ज्यादा अधिकार और सुविधाएँ उपलब्ध[…]

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क्या भारत को इजराइल बनना होगा?

क्या भारत को इजराइल बनना होगा? यदि ऐसा हो जाये तो इससे बेहतर कुछ भी नहीं हो सकता, लेकिन ऐसा होगा नहीं कभी भी यहाँ , क्यूंकि इसके लिए देश के हर निवासी मे अपने राष्ट्र के लिए मर मिटने का जज्बा होना चाहिए जो इस देश के लोगो मे कभी का ख़त्म हो चुका है। हा हा हा खुदगर्ज़, मक्कार और देशद्रोहियों से भरे इस देश की इजराइल जैसे महान और देशप्रेमियों से भरे उसके लिए अपना सर्वस्व अर्पण करने के लिए तैयार इसराइलियों से कोई भी तुलना नहीं, यहाँ तो देश को बेचनेवाले, इसका सौदा और टुकड़े टुकड़े[…]

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ब्राह्मण कौन है और कहाँ से आए हैं?

ब्राह्मण कौन है, और कहाँ से आए हैं?

ब्राह्मण कौन है, और कहाँ से आए हैं? सर्वप्रथम, ब्राम्हण कोई जाति नहीं है, जो कहीं से आई है या आएगी यह मिथ्या धारणा है, इसका कोई भी वजूद नहीं है, ब्राम्हण एक विशिष्ट मानसिक, आध्यात्मिक स्थिति है मनुष्य की, कोई भी व्यक्ति विशिष्ट गुणों से युक्त होकर ब्राम्हण हो सकता है‍‍। वैदिक काल एवं इसके पूर्ववर्ती ऋषियों ने मनुष्य के हजारों साल के अध्धययन से यह पाया की मनुष्य की जीवन व्यवस्था और प्रवृत्तियों के अनुसार चार मूल प्रवृत्तियां और जीवन दिशाएं है जो पूरे समाज मे मौजूद व्यक्तियों की मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक समझ और क्षमता और जीवन[…]

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कृष्ण

क्या रामायण और महाभारत वास्तविक है?

यह एक गंभीर और व्यापक समस्या है इन दिनों, इस देश की आधी से ज्यादा आबादी अपनी वास्तविकता से ही इनकार कर रही है, १२०० वर्षों की गुलामी और पिछले ७० वर्षों से कांग्रेस और वामपंथी लेखकों और विचारकों ने इतना विरूपण किया है, हमारी सभ्यता और संस्कृति का लोग अपमान करने लगे हैं और अपने आप पर ही संदेह करने लगे है।

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