धर्म गुरूओं के संबंध में आपकी क्या राय है?

धर्म गुरूओं के संबंध में आपकी क्या राय है?

धर्म गुरूओं के संबंध आपकी क्या राय है? मेरे पाठकों में से कुछ ने पूछा है की धर्म गुरूओं के संबंध में आपकी क्या राय है? मेरी रुचि किसी भी किस्म के धर्मगुरुओं में नहीं है, मै बुद्ध पुरुषों, रहस्यवादियों और सत्य के खोजियों और उद्घोषकों में रुचि रखता हूं, यही हमारी संस्कृति और आध्यात्मिक शिक्षा का सार है, मानो नहीं जानो, जो स्वयं की खोज में उतरने और उसमे विकसित होने में सहयोगी हो वही गुरु बाकी सब दुकानदार, और कुछ ना कुछ बेचने वाले लोग। दुनिया के तमाम तथाकथित धर्मगुरुओं का सत्य  सभी तथाकथित धर्मगुरु, मौलवी, पादरी, पंडित[…]

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सदगुरु जग्गी वासुदेव कौन हैं, किन लोगों को उनसे समस्या है?

सदगुरु जग्गी वासुदेव कौन हैं, किन लोगों को उनसे समस्या है? मेरे एक प्रिय Quora लेखक मित्र ने प्रश्न किया है सद्गुरु जग्गी वासुदेव कौन हैं, किन लोगों को उनसे समस्या है? सदगुरु जग्गी वासुदेव, एक योगी, रहस्यदर्शी और बुद्ध पुरुष हैं, और बुद्ध पुरुषों से बुद्धुओं को, मूढो, दुष्टों को, षडयंत्रकारियों, कुटिल लोगों को सदैव समस्या रही है। ऐसा सदा से हुआ है चाहे वो राम, कृष्ण, बुद्ध, महावीर, जीसस, कबीर, नानक, ओशो या सदगुरु ही क्यों ना हो, इन सभी ने अपने समय में यहाँ तक की सेकड़ों, हज़ारों वर्ष बाद आज भी इन दुर्बुद्धि लोगों की मुर्खता[…]

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आध्यात्मिक साधकों द्वारा केश रखने और न रखने का क्या कारण है?

aadhyatmik sadhakon dwara kesh rakhne aur na rakhne ka kya karan hai

आध्यात्मिक साधकों द्वारा केश रखने और न रखने का क्या कारण है? मेरे कुछ पाठकों ने प्रश्न किया है की आध्यात्मिक साधना पथ पर अग्रसर  कुछ साधक अपने सिर और चेहरे के बाल क्यों निकाल देते हैं हैं, जबकि अन्य उन्हें बड़ा करते हैं? आध्यात्मिक साधकों द्वारा केश रखने और न रखने का क्या कारण है? दरअसल विभिन्न आध्यात्मिक पथों पर चलनेवाले साधक विभिन्न चिन्हों को धारण करते है जो उन विभिन्न साधना पद्धितियों में उपयोगी होती है, केश रखना या उनका त्याग करना या निकाल देना उनकी साधना और संन्यास की प्रक्रिया का अंग होते हैं। बुद्ध और जैन[…]

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bharat ki samsyaen aur samadhaan

भारत की समस्याएं और इसके समाधान क्या हैं?

भारत की समस्याएं और इसके समाधान क्या हैं? भारत एक विकासशील राष्ट्र है और पिछले 70 वर्षों में यहाँ लोगों ने मिली हुई आज़ादी का सर्वाधिक दुरूपयोग किया है, क्यूंकि 1000 वर्षों की गुलामी ने, यहाँ के लोगों को इतना आत्महीन, पथभ्रष्ट  और पंगु बना दिया की वो भूल ही गए की वो कभी विश्व में सिरमौर थे विश्व पटल पर। विश्व के सभी राष्ट्रों और संस्कृतियों के लिए आकर्षण और प्रेरणा का केंद्र भारत क्यूँ और कैसे अंतहीन समस्याओं का गढ़ बन गया है? आखिर भारत की समस्याएं और इसके समाधान क्या हैं? भारत की सबसे बड़ी समस्या यह[…]

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आतंकवाद विश्व का शत्रु

भारत के वास्तविक शत्रु कौन हैं?

भारत के वास्तविक शत्रु कौन हैं? भारत के वास्तविक शत्रु कौन हैं? दुर्भाग्य से इस देश में रहने वाले तथाकथित ब्रेनवाश किये हुए लिबरल हिन्दू और तथाकथित सेक्युलर लोग, मुगलों और ब्रिटिश हुकूमत  की दासता के फलस्वरूप उत्पन्न कनवर्टेड और प्रोग्राम्ड मुस्लिम और इसाई, जिन्हें अपनी जड़ों का भान नहीं है, जो षड़यंत्रकारियों और देशी विदेशी दुश्मनों के हाथ की कठपुतलियां बनकर अपने ही राष्ट्र को खोखला और खंडित करने के लिए जी जान से प्रयासरत हैं। यह सभी 1000 वर्षों की दासता और पिछले 75 वर्षों की कांग्रेस और कम्युनिस्ट अलगाववादियों और भारत की संप्रभुता और विराट गौरवमयी और[…]

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भारतीय संस्कृति शाश्वत क्यों है?

भारतीय संस्कृति शाश्वत क्यों है? भारतीय संस्कृति शाश्वत क्यों है? क्यूंकि इसका आधार स्वतंत्रता और स्वीकृति है,  किसी भी तरह का जबरदस्ती और बल पूर्वक आरोपण नहीं है, क्यूंकि जो थोपा जाएगा वो आपको गुलामी और हीनता में ले जाएगा, जैसा विश्व के दूसरे धर्मों के साथ है वो बलपूर्वक मानने का आग्रह करते है, अमानवीय, अनैतिक भय और दंड के विधान के साथ। हमारी देवभूमि में विकसित सभी विचार और जीवन की पद्धतियां, मुक्ति का पथ है, जागृति और जानने के मार्ग है, वो आपको प्रश्न करने, खोज और अनुसंधान करने, प्रयोग करने, अनुभवों में उतरने की विधियां और[…]

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