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गुरू बिना गति नहीं, क्या यह सत्य है?

गुरू बिना गति नहीं, क्या यह सत्य है? मै इस कथन से पूर्णतया सहमत हूं, मनुष्य एक मात्र ऐसा प्राणी है जिसे जन्म से लेकर मृत्यु तक जीवन और जगत के संबंध में सब कुछ जानना और सीखना होता है, इसके बिना हम बेहतर जीवन जीने लायक नहीं बन सकते और ना ही करने योग्य और ना करने योग्य का बोध पा सकते है। बिना  योग्य गुरू और उचित जानकारी, समझ और स्पष्ट दृष्टि के हम अपने और दूसरों के लिए समस्याएं और अनचाही बातों और घटनाओं की सृष्टि करके अपना और उनका जीवन कष्टकारी बनाते रहेंगे। हमें सदैव बेहतर[…]

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गुरू को ईश्वर से भी ऊँचा दर्जा क्यों दिया जाता है?

गुरू को ईश्वर से भी ऊँचा स्थान क्यों दिया जाता है?

गुरू को ईश्वर से भी ऊँचा दर्जा क्यों दिया जाता है?  गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु गुरु देवो महेश्वर, गुरु साक्षात् परमं ब्रह्मा तस्मै श्री गुरुवे नम: गुरू को ईश्वर से भी ऊँचा स्थान क्यों दिया जाता है? यह हमारी संस्कृति का मूलमंत्र है, सद्गुरु की कृपा से ही हमे अपने और समस्त के रहस्यों का पता चलता है, वो ही कार्य कारण को समझने की बुद्धि और करने योग्य का विवेक प्रदान करते हैं। वो ही हमारे जीवन को गौरव और सार्थकता के बोध से भरते हैं, वो ही हमसे हमारा परिचय कराते हैं और हममे स्थित समस्त का भी।[…]

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आध्यात्मिकता के कितने प्रकार हैं?

आध्यात्मिकता के कितने प्रकार हैं?

आध्यात्मिकता के कितने प्रकार हैं? आध्यात्मिकता के कितने प्रकार हैं? आध्यात्मिकता का कोई प्रकार नहीं होता है, वो रूप, रंग और आकार प्रकार से मुक्त है, वो कोई वस्तु नहीं है कोई ऐसी चीज़ नहीं है जिसके बारे मे आप कोई परिभाषा गढ़ सकें। आध्यात्मिकता कोई विश्वास या उधार प्राप्त ज्ञान नहीं है यह स्वयं के द्वारा अर्जित आंतरिक बोध की उपलब्धि है, इसका बाह्य उपचारों से कोई भी लेना देना नहीं है, यह स्वयं की खोज और बोध की प्राप्ति की प्रक्रिया है, इसमें विभिन्न साधना पद्धतियाँ उपयोगी है लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात आपकी खोज, संपूर्ण समर्पण, और अपने[…]

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क्या श्रद्धावान व्यक्ति जीवन मे कभी दुखी नहीं होता?

क्या श्रद्धावान व्यक्ति जीवन मे कभी दुखी नहीं होता?

क्या श्रद्धावान व्यक्ति जीवन मे कभी दुखी नहीं होता? क्या श्रद्धावान व्यक्ति जीवन मे कभी दुखी नहीं होता? सुख और दुःख का इस बात से कोई भी अंतर नहीं पड़ता की कोई श्रद्धावान है या अश्रद्धालु, यह व्यक्ति के विचारों और कर्मों पर निर्भर होता है पूर्णतया। बिना अंधरे के रौशनी, बिना भूख के रोटी और बिना दुःख के सुख का कोई भी मूल्य नहीं है, वो एक दुसरे के पूरक और अन्तरंग है, उनका सह अस्तित्व है एक के बगैर दुसरे का कोई वजूद नहीं हो सकता। इसलिए इस बात को भूल जाइये बल्कि सत्य तो यह है की[…]

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ब्राह्मण कौन है और कहाँ से आए हैं?

ब्राह्मण कौन है, और कहाँ से आए हैं?

ब्राह्मण कौन है, और कहाँ से आए हैं? सर्वप्रथम, ब्राम्हण कोई जाति नहीं है, जो कहीं से आई है या आएगी यह मिथ्या धारणा है, इसका कोई भी वजूद नहीं है, ब्राम्हण एक विशिष्ट मानसिक, आध्यात्मिक स्थिति है मनुष्य की, कोई भी व्यक्ति विशिष्ट गुणों से युक्त होकर ब्राम्हण हो सकता है‍‍। वैदिक काल एवं इसके पूर्ववर्ती ऋषियों ने मनुष्य के हजारों साल के अध्धययन से यह पाया की मनुष्य की जीवन व्यवस्था और प्रवृत्तियों के अनुसार चार मूल प्रवृत्तियां और जीवन दिशाएं है जो पूरे समाज मे मौजूद व्यक्तियों की मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक समझ और क्षमता और जीवन[…]

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क्या आपको लगता है कि हम सभी आध्यात्मिक या मानसिक रूप से जुड़े हुए हैं?

क्या आपको लगता है कि हम सभी आध्यात्मिक या मानसिक रूप से जुड़े हुए हैं? यह प्रश्न मेरे ब्लॉग एवं Quora के प्रबुध्द पाठक द्वारा पूछा गया है  इस पूरे ब्रम्हांड का एक एक परमाणु आपस मे जुडा है, सम्बद्ध है। चाहे इसके बारे मे कोई समझ या प्रतीति हमे हो या नहीं। एक छोटा सा प्रयोग करके देखिये आप अपने आसपास किसी भी प्रसन्न और मुस्कुराते व्यक्ति, या बच्चे को देखिये, आपके अंदर भी कुछ खिलने लगेगा। इसी तरह किसी उदास और रोते हुए व्यक्ति को देखिये आपके अंदर भी थोड़ी उदासी और दर्द उतर जायेगा। कोई आप की[…]

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