ब्राह्मण कौन है और कहाँ से आए हैं?

ब्राह्मण कौन है, और कहाँ से आए हैं?

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ब्राह्मण कौन है, और कहाँ से आए हैं?

सर्वप्रथम, ब्राम्हण कोई जाति नहीं है, जो कहीं से आई है या आएगी यह मिथ्या धारणा है, इसका कोई भी वजूद नहीं है, ब्राम्हण एक विशिष्ट मानसिक, आध्यात्मिक स्थिति है मनुष्य की, कोई भी व्यक्ति विशिष्ट गुणों से युक्त होकर ब्राम्हण हो सकता है‍‍।

वैदिक काल एवं इसके पूर्ववर्ती ऋषियों ने मनुष्य के हजारों साल के अध्धययन से यह पाया की मनुष्य की जीवन व्यवस्था और प्रवृत्तियों के अनुसार चार मूल प्रवृत्तियां और जीवन दिशाएं है जो पूरे समाज मे मौजूद व्यक्तियों की मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक समझ और क्षमता और जीवन उद्देश्यों की पूर्ति के अनुरूप है।

सभी व्यक्तियों को उनकी मानसिक, शारीरिक क्षमता बुद्धि और समझ के आधार पे कार्य करने या अपना कार्य चुनने की स्वतंत्रता थी, कोई भी व्यक्ति अपनी क्षमता, लगन और अध्यवसाय के आधार पे किसी भी कार्य के लिए उपयुक्त बन सकता था।

इस तरह से चार प्रमुख प्रवृत्तियां विभिन्न लोगों की विशिष्ट्ताओं के आधार पे निर्धारित की गयी थी ताकि लोग यह समझ सके की उनमे किस कार्य को करने की सर्वाधिक योग्यता है।

यह समाज मे विभिन्न कार्यों के विभाजन और अपनी क्षमताओं के अनुरूप अपना योगदान देने की एक उत्तम और स्वस्थ व्यवस्था थी, इसमें किसी भी किस्म का कोई पक्षपात और आरोपण नहीं था।

एक कृषक, राजकार्य के लिए अनुपयुक्त था सिर्फ कृषि करने की क्षमता के आधार पर, लेकिन वो यदि युध्धकौशल और शस्त्र चलाने और राजकीय कार्यों को करने की योग्यता गृहण कर ले तो क्षत्रिय की भुमिका मे जा सकता था।

इस प्रकार जो लोग ज्ञान, तप, योग, और आध्यात्मिक साधना मे दीक्षित होने के इच्छुक होते और बाकि सभी श्रेणियों मे कार्य करने वाले लोगो के कल्याण, शिक्षण और श्रेष्ठता की वृद्धि मे अपने जीवन को लगाने के इच्छुक होते वो ब्राम्हण की पदवी धारण कर सकते थे।

और कोई भी व्यक्ति इस अवस्था को प्राप्त कर सकता था, अपने तप, साधना, योग, ज्ञान और अध्धययन से ब्राम्हण हो सकता था, यह कोई वर्ग या जाति विशेष के लिए नहीं था, वरन एक विशेष गुणवत्ता के विकसित हो जाने पर प्राप्त होनेवाली पदवी थी।

ब्राह्मण कौन है और कहाँ से आए हैं?

इस अवस्था को प्राप्त करने के लिए व्यक्तियों को योग्य और श्रेष्ठ ऋषियों और गुरुओं के सानिध्य मे वर्षों तक कठोर, तप, साधना और प्रशिक्षण से गुजरना होता था, तब वे ब्राम्हण होने के लायक बनते थे, उन्हें एक विशिष्ट जीवन शैली अपनानी होती थी, उन्हें ज्ञान, तप और त्याग का जीवन ही जीना होता था और उनके जीवन का परम उद्देश्य सभी प्राणियों की भलाई, गुणवत्ता और श्रेष्ठता मे बढ़ावा करना होता था।

हमारे महान देश मे सारी कलाएं, संगीत, विज्ञान, गणित, ज्योतिष, खगोल शास्त्र, चिकित्सा विज्ञान, आयुर्वेद, सभी विध्यायें और कलाएं, अविष्कार हमारे गुणी ऋषियों और आध्यात्मिक शिक्षकों की खोज है, जो अपने समय के सर्वश्रेष्ठ ब्राम्हण थे।

यह ही ब्राम्हण का सच्चा स्वरुप है, चाहे कोई भी समय हो, जो भी व्यक्ति इन सभी गुणों और कार्यों मे संलग्न हो, जिसके जीवन का उद्देश्य मानव मात्र के कल्याण के लिए, उनकी चेतना के विकास के लिए उनकी सार्वभौमिक उन्नति और श्रेष्ठता के लिए कार्य करना हो वो ब्राम्हण है चाहे वो किसी भी देश, जाति, सम्प्रदाय और भोगोलिक स्थिति मे जन्म लिया हो और कार्य कर रहा हो।

सारेे विश्व मे ऐसे ब्राम्हण जन्म लेते रहे है, लेते रहेंगे, आप डॉ होमी जहाँगीर भाभा, श्रीनिवासन रामानुजन, डॉ. अब्दुल कलाम को क्या कहेंगे, आप अल्बर्ट आइन्स्टाइन को क्या कहेंगे, यह सभी इन ब्राम्हणों की कोटि मे आते है जिहोने ने मानव मात्र के कल्याण के लिए जीवन लगाया और उन्हें सर्वश्रेष्ठ उपहार, अपने ज्ञान, और अविष्कारों के रूप मे दिया।

सिर्फ नाम, जाति या उपनाम से कोई भी व्यक्ति कोई पदवी के लायक नहीं बनता यह गुण आधारित व्यवस्था थी कोई लेबल लगाने की व्यवस्था नहीं थी इसे याद रखिये और भ्रामक प्रचार और मूर्खतापूर्ण व्याख्याओं से सावधान रहिये।

बहुत सारे गुणी मित्रों ने एतिहासिक तथ्यों के आधार पर बहुत सारी बातें टिप्पणियों के रूप मे लिखी है, मुझे नहीं पता की उनकी जानकारी का स्रोत्र क्या है, और यह सब बातें हमे विदेशी इतिहासकारों या फिर कम्युनिस्ट विचारधारा से प्रभावित इतिहासकारों ने रची है और हम अंधों की तरह उसपर यकीन कर रहे हैं, बिना किसी विशिष्ट और प्रामाणिक साक्ष्य के।

इस सम्बन्ध मे सारे सिद्धांत और तथ्य उनके द्वारा जुटाए गए है, जिन्हें इस देश की प्राचीन परंपरा और गौरव का कुछ भी पता नहीं है, इस देश मे कभी भी इतिहास नहीं लिखा गया क्यूंकि यहाँ सिर्फ सत्य के अवगाहन और ग्रहण करने की परंपरा रही है और सत्य सदा मौजूद है, और जो सत्य का खोजी है वो इसे प्राप्त कर सकता है, अपनी खोज, अवलोकन और साधना के द्वारा, यही ब्राम्हण का विशिष्ट गुण है।

हमारी संस्कृति मे ब्राम्हण कोई जाति नहीं रही कभी भी वो एक विशिष्ट गुणवत्ता और जीवन शैली को धारण करने वाले, जो तर्क और तथ्यों के पार जाकर सत्य का अनुसन्धान और प्राकट्य करने की क्षमता रखता है वो ही ब्राम्हण है।

यही हमारी संस्कृति की ब्राम्हण की परिभाषा है, हमे उधार ज्ञान और दूसरों के स्पष्टीकरण और प्रमाणों की जरुरत नहीं है, वास्तविक ब्राम्हण अपने आप मे सबसे बड़ा प्रमाण होता है, और वो ही प्रमाणिक है सदा से।

इस देश मे राम, कृष्ण, महावीर, बुद्धा, आदि शंकराचार्य, नानक, कबीर, श्री रामकृष्ण परमहंस, महर्षि रमण, ओशो, विवेकानंद जैसी अनंत विभूतियों ने जन्म लिया है और वर्तमान मे सद्गुरु जग्गी वासुदेव जीवंत और सबसे प्रमाणिक ब्राम्हण और ब्रम्हज्ञ विभूतियों मे से एक हैं, जो चेतना के परम शिखर पर है वो ही ब्राम्हण है।

धन्यवाद।

यह प्रश्न मेरे ब्लॉग एवं Quora के प्रबुध्द पाठक द्वारा पूछा गया है 

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