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भारत की समस्याएं और इसके समाधान क्या हैं?

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भारत की समस्याएं और इसके समाधान क्या हैं?

भारत एक विकासशील राष्ट्र है और पिछले 70 वर्षों में यहाँ लोगों ने मिली हुई आज़ादी का सर्वाधिक दुरूपयोग किया है, क्यूंकि 1000 वर्षों की गुलामी ने, यहाँ के लोगों को इतना आत्महीन, पथभ्रष्ट  और पंगु बना दिया की वो भूल ही गए की वो कभी विश्व में सिरमौर थे विश्व पटल पर। विश्व के सभी राष्ट्रों और संस्कृतियों के लिए आकर्षण और प्रेरणा का केंद्र भारत क्यूँ और कैसे अंतहीन समस्याओं का गढ़ बन गया है? आखिर भारत की समस्याएं और इसके समाधान क्या हैं?

भारत की सबसे बड़ी समस्या यह है, की यह देश अपनी  15000 वर्षों से अधिक प्राचीन और गौरवमयी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत से पूरी तरह कट चूका है। यहाँ का जन मानस चेतना और आत्म गौरव से रिक्त लोगों का देश बन चुका है, लोग आत्महीन, और दूषित प्रभावों के आधीन हो गए हैं पिछले 1000 साल की गुलामी ने इन्हें आत्मिक और आध्यात्मिक रूप से पंगु, विखंडित और दीन हीन बना दिया है।

इस देश के लोग अपने प्राचीन आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, वैज्ञानिक खोजों, ऋषियों, वैज्ञानिकों और उनकी विश्व को दी गयी देन के प्रति पूर्णतया अनभिज्ञ हैं। कांग्रेस और कम्युनिस्ट नेताओं, बुद्धिजीवियों, मुगलों और अंग्रेजों के गुलामों, चाटुकारों और सेवकों ने इस राष्ट्र के जन मानस के दिल दिमाग को अपने अतीत के महान  वैभव, श्रेष्ठतम खोजों, अविष्कारों और महानतम जीवन मूल्यों के सृष्टा और उद्घोषकों के सम्बन्ध में पूर्णतया अनभिज्ञ और अँधा बनाये रखा है।

उन्हें गलत और भ्रामक जानकारी, विद्रूपित इतिहास और तथ्य उपलब्ध कराये गयी है और उसे उनके दिल दिमाग पर थोप दिया गया है, उन्हें इतना बीमार और भ्रमित कर दिया है की वो अपने ही पूर्वजों और उनके गरिमामयी कार्यों को, अद्भुत उपलब्धियों को स्वीकार करने को राजी नहीं। वे उन्हें संदेह और घृणा की दृष्टि से देखते है, यह है गुलामी से हुए पतन और बेहद कुटिलतापूर्वक आयोजित सामूहिक ब्रेनवाश का भयानकतम परिणाम।

यहाँ के लोगों के अवचेतन में यह घर कर गया है की इस देश को जो कुछ मिला है, विदेशी हमलावरों और पाश्चात्य जगत से मिला है, यहाँ के लोग अपनी विराट सांस्कृतिक और एतिहासिक और आद्यात्मिक विरासत के प्रति बिलकुल भी जागरूक और संज्ञान में नहीं है, यही इस दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति की वजह है।

जो राष्ट्र और उसके नागरिक अपनी संस्कृति और अतीत के गौरव के प्रति सम्मान और चेतना का भाव खो देते हैं वो हमारे राष्ट्र की तरह दुर्गति को प्राप्त होते हैं, वो अपने ऊपर हमला करने वालों उन्हें लूटने और पद दलित और भ्रष्ट करनेवालों को अपने से श्रेष्ट और श्रेयस मानने लगते हैं।

यह उनके पतन और आत्महीनता की पराकाष्ठा होती है, और हमारा राष्ट्र इसी प्रोपेगंडा और षड़यंत्र का पिछले 1000 वर्षों से शिकार रहा है और अपनी रुग्णता के चरम से मुक्त होने की दिशा में अग्रसर हो रहा है।

यहाँ लोगों ने संपत्ति, पद और सुविधाएँ तो प्राप्त कर ली हैं, लेकिन अपना आत्मगौरव और आत्मसम्मान गिरवी रख दिया है, देश के गद्दारों, शत्रुओं और दलालों के हाथों, और अपनी ही मातृभूमि को दूषित, कलंकित और अपमानित करने के घृणित षड़यंत्र में जी जान से भागीदारी कर रहे हैं, यह इस देश का सबसे बड़ा दुर्भाग्य और समस्या है।

यहाँ के लोगों से आज़ादी सम्हाली नहीं गयी, और जो भी नेता मिले वो बेहद अदूरदर्शी, अव्यवहारिक, अनुभव विहीन, आत्मकेंद्रित और सत्ता सुन्दरी पर मुग्ध अपने ही लाभ और गौरव की प्रतिष्ठा में लीन रहे। उन्हें 1000 वर्षों की गुलामी से विकृत, अपनी जड़ों से उखडे हुए , उत्पीडित और सांस्कृतिक रूप से मृत, समस्याग्रस्त कुपोषित, त्रस्त और लुटे हुआ राष्ट्र और इसके नागरिक, उन्होंने  इनकी सुरक्षा की कोई भी फिक्र नहीं की,  उनके लिए करोड़ों देशवासियों की दुर्दशा,  जीवन, भविष्य और प्रगति उनका मुख्य लक्ष्य नहीं रहे।
परिणाम यह हुआ जैसा राजा और नेता वैसी ही जनता हो गयी, वो भी अपने ही राष्ट्र को लूटने, नोचने खसोटने और भ्रष्ट करने में जी जान से लग गयी और पिछले 70 सालों में यही भाव प्रधान रहा है। यह बेहद शर्मनाक है की लूट और भ्रष्टाचार इस देश में शिष्टाचार और लोगों के जीवन का अभिन्न अंग बन गया है, गुलामी और आत्महीनता से कितना पतन हो सकता है किसी देश के लोगों का इसकी मिसाल है हमारा देश।
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भारत की सबसे बड़ी समस्या सत्ता में परिवारवाद और अंग्रेजियत की गुलामी, जिसके यह प्रणेता और पोषक हैं,इनसे मुक्ति देश के हित में है

इस देश के नेताओं ने भी और जनता ने भी, इस बात को अनदेखा करते हुए की वो अपने ही घर में आग लगाकर तमाशा देख रहे हैं और शत्रुओं और लूटेरों और षड्यंत्रकारियों के मंसूबों को पूरा करने का सामान बने हुए हैं, इतनी भीषण बर्बादी भी इन्हें नहीं जगा पाई, इससे बड़ा दुर्भाग्य और नपुंसकता किसी राष्ट्र के नागरिकों और नेताओं लिए क्या हो सकती है।

इस देश का विनाश इस देश के नेता और जनता दोनों ने मिलकर कर रखा है और वो आज भी नशे में है, उनकी मूर्छा और नींद बहुत गहरी है, इसे तोडना बेहद जरुरी है, वर्ना यह राष्ट्र अपन गौरव और अस्मिता खोकर नष्ट हो रहा है।

यह हमारा देश है, इसकी रक्षा, गौरव और समृद्धि की जिम्मेदारी हमारी है, किसी सरकार और हमारी सेना की नहीं, यह हमारा देश है, यह हमारी जिम्मेदारी है सबसे पहले, देश नक़्शे पर नहीं देश में रहनेवालों के ह्रदय और आत्मा में बसता है।

आज़ादी के पश्चात हमारे  मूर्छित, लोभी लालची, पथभ्रष्ट नेताओं और यहाँ की जनता का मुख्य लक्ष्य अधिक से अधिक संपत्ति का अर्जन और अपने महिमामंडन में ही रहा है। इस देश के 3 प्रधानमंत्री जो एक ही परिवार से आये हैं, उन्होंने अपने जीते जी ही स्वयं को भारत रत्न  प्रदान कर दिया, उनके नाम से हजारों संस्थान, सड़कें, स्मारक निर्मित हैं आज़ादी के बाद सर्वाधिक समय तक देश की सत्ता इन्हीं ने सम्हाली है, और देश गंभीर रूप से बीमार और समस्या ग्रस्त और भ्रष्ट हुआ है, इनके शासनकाल में इस देश के सबसे बड़े घोटाले और लूट और आतंकवादी घटनाएँ और युद्ध हुए हैं।

इनका एक ही लक्ष्य रहा साम, दाम, दंड भेद से सत्ता में बने रहना और स्वयं को प्रतिष्ठित और लाभन्वित करना, उन्होंने अपने आसपास सिर्फ चाटुकारों, भ्रष्ट और घटिया लोगों को जिन पर वो आसानी से दवाब बनाकर शासन कर सके को एकत्रित होने दिया, बाकि श्रेष्ठ लोगों को षड़यंत्रपुर्वक अपने मार्ग से हटा दिया।

इन्होने इस राष्ट्र को जातिवाद, साम्प्रदायिकता का न भरनेवाला जख्म दिया, इस देश के 3 टुकड़े कर दिए (पाकिस्तान, भारत और बांग्लादेश), शत्रुओं को बढ़ावा और अनाधिकार लाभों को लूटने और हमारे अधिकार के क्षेत्रों पर कब्ज़ा करने दिया (तिब्बत, पाक अधिकृत काश्मीर)। आज भी यह सात और वोट बैंक की राजनीति और देश को अस्थिर, खंडित और समस्याग्रस्त बनाने के लिए कोई भी कार्य करने के लिए प्रस्तुत हैं, ऐसा कर रहे हैं।

इन्होने राष्ट्र की सेना और संसाधनों को व्यवस्थित और सशक्त करने के लिए कोई कार्य नहीं किया, बल्कि सत्ता में बने रहने और अपने गौरव गान के लिए हर राष्ट्रीय संस्ठा, संविधान और संवैधानिक मूल्य की हत्या और विरूपण किया, इस देश में जाति और धर्म के आधार पर वोट बैंक की राजनीति की शुरुआत की, जो आज नासूर बनकर इस देश को खोखला कर रही है। 

आज भी इस देश का बहुत बड़ा वर्ग,  इन कुंठित और पथभ्रष्ट बिकाऊ पार्टी और राजनेताओं की गुलामी में व्यस्त है, भ्रष्ट और पूर्वाग्रही बुद्धिजीवी और मीडिया इनके तलवे चाटने और इनके महिमामंडन में लगा हुआ है। इस महान देश और सबसे बड़े लोकतंत्र के स्तम्भ इसकी कब्र खोदने पर तुले हुए है चाहे वो संसद हो, न्यायपालिका हो, मीडिया हो या इस देश की जनता, सभी इस देश की और तथाकथित लोकतंत्र की अर्थी तैयार करने में लगे हुए हैं। अराजकता और बुद्धिहीनता और चारित्रिक दिवालियेपन की ऐसी पराकाष्ठ कभी देखने नहीं मिली, इस देश में, यह कहाँ आ गए हैं हम, हमे इसे बदलना होगा।

हमें इन सड़े गले संस्थानों और इनके सिरमौर बने लोगों को बहिष्कृत और विस्थापित करना होगा, नए स्वस्थ विधान, मूल्यों और इसकी प्रतिष्ठा करने वाली शक्तियों और व्यक्तियों को पुनः स्थापित करना होगा।

हमारा राष्ट्र पुनर्निर्माण के एक बहुत जटिल दौर से गुजर रहा है , हमे जागरूकता पूर्वक अपना कर्त्तव्य और निष्ठा इसके प्रति निभानी होगी, वर्ना हम आने वाली पीढ़ी के लिए एक बेहद अंधकार पूर्ण भविष्य और विरासत निर्मित कर रहे हैं, हमे इस दुर्भाग्य से बचना होगा और जो सार्थक और जरुरी है हर हाल में करना होगा।

यह देश राजशाही और विदेशी दासता से मुक्त नहीं हो पाया है, आज़ादी मिलने  के 75 वर्षों के पश्चात् भी, आज भी मुग़ल और अंग्रेजी गुलामी और हीनता यहाँ के लोगों के दिल और दिमाग से गयी नहीं है। वो आज भी उन्ही की गुलामी और उनके द्वारा इनके गलों में पहनाये गए गुलामी के पट्टे को अपनी विचारधारा, कर्म और अभिव्यक्ति से जी और ढो रहे हैं और इस देश को अंतहीन गुलामी की तरफ ले जाने की अंधी और विनाशकारी असफल कोशिश कर रहे है।

आज भी इस देश के बहुत सारे लोग, एक परिवार विशेष की अंध भक्ति और मूर्ख व्यक्तियों, अयोग्य और सर्वाधिक भ्रष्ट और अनिष्टकारी समूह और दल की चापलूसी और गुलामी में व्यस्त हैं, इस देश के लोगों ने सच देखना, सुनना और स्वीकारना बहुत समय पहले से बंद कर दिया है, इसलिए वो इन्सान होने के बावजूद भेड़ों की तरह व्यव्हार कर रहें है और पतन की और अग्रसर हो रहे हैं, यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक है।

इस देश की सबसे बड़ी समस्या यह है कि इस देश के लोगों को अपने देश और इसकी संस्कृति की पहचान और मूल्य नहीं है। लम्बे समय की गुलामी, ब्रेनवाश और आत्महीनता और देशी और विदेशी दुश्मनों के षड्यंत्रों ने इस देश के जन मानस को कुंठित और विषाक्त कर दिया है, उन्होंने, इन्हें स्वयं की संस्कृति और महान मूल्यों के प्रति हीनता, अविश्वास और घृणा से भर दिया है।

हमारे देश के लोग यह भूल गए हैं की हमारे राष्ट्र की सभी खूबियां, ज्ञान, गुणवत्ता, आध्यात्मिक वैभव और अतुलनीय संपत्ति और समृद्धि दुनिया के तमाम लूटेरों, ठगों, लालची और विस्तार और वैभव के आकांक्षियों के लिए सदैव आकर्षण का केंद्र रहा है, सिर्फ 300 वर्ष पूर्व तक भारत विश्व की सबसे बड़ी औद्योगिक और आर्थिक शक्ति था।

इसी वजह से यह राष्ट्र इन तमाम दुर्दांत ठगों, लूटेरों, उपनिवेशवादियों और हमलावरों द्वारा आक्रमण करने और इसे अपना निशाना बनाने के लिए लक्ष्य किया गया था।

ऐसा होने में हमारे ही देश के गद्दारों और नीच लोगों ने इस लूट और बर्बादी में सहयोग किया है और आज भी यही कर रहे हैं, क्यूंकि इस देश के लोगों को न तब समझ में आया था ना आज ही समझ में आ रहा है।

मेरी नज़र में कुछ बेहद महत्वपूर्ण कारक है जो यहाँ भीषण समस्या की तरह मौजूद हैं, यदि इन सभी कारकों पर जागरूकता पूर्ण तरीके से जरुरी कार्य किया जाये तो हमारा राष्ट्र कुछ ही समय में विश्व के सर्वाधिक प्रभावशील और समृद्ध राष्टों में से एक होगा।

सच तो यह है की हम उस दिशा की और अग्रसर हो चुके हैं, कई दशको के बेहद घटिया और नपुंसक शासन के बाद एक सार्थक और बेहद प्रभावी नेतृत्व में हमारा राष्ट्र एक नयी दिशा और ऊंचाई की और कदम बढ़ा रहा है, हमे इसमें अपना पूर्ण और जिम्मेदार योगदान देना होगा –  

भारत की मुख्य समस्याएँ  – (वर्तमान परिप्रेक्ष्य में) 
  1. इस देश के लोगों में अपनी धरती के लिए प्रेम और निष्ठा का बेहद अभाव है, इतने गद्दार और देशद्रोही कहीं और नहीं होंगे जितने इस देश में हर काल में हुए और आज भी हैं, और देश को कमजोर और खोखला करने में लगे हुए हैं।
  2. इस देश के लोगों को अपने व्यक्तिगत स्वार्थ पूर्ति से ऊपर कोई भी चीज नहीं है, सब अपने स्वार्थों की पूर्ति में लगे हैं, आप आसानी से इन्हें लालच देकर कोई भी कार्य करवा सकते हैं, चारित्रिक पतन की पराकाष्ठा है यहाँ।
  3. इस देश के लोग जाति, धर्म और वर्ग में बंटे हुए है, और इस आधार पर लाभ लेने के लिए कुछ भी करने को तैयार है, राजनेता उनकी इस कमजोरी का पिछले 75 सालों से दोहन कर रहे हैं, और यह मूर्ख  और अंधे लोग इन्हें इसमें सहयोग कर रहे हैं।
  4. यहां अयोग्य और अपराधी लोग हमारा प्रतिनिधित्व करते हैं, और लोग उन्हें स्वीकार और सहयोग प्रदान करते है, यहाँ घनघोर अपराधों और अन्यायपूर्ण कार्यों और भ्रष्ट लोग लोगों द्वारा चुने जाते हैं।
  5. यहां गुण की कोई कीमत नहीं है, लोगों की गुणवान और श्रेष्ठ होने में कोई रुचि नहीं है, बिना किसी योग्यता और गुण के लोग हर किस्म का लाभ और सुख सुविधा चाहते है, गुणवान, प्रतिभावान इस देश से बाहर जाने के लिए मजबूर हें, आज पूरे विश्व में भारतीय मूल के लोग सर्वाधिक धनीऔर प्रभावशाली पदों पर कार्यरत हैं।
  6. लोगों में देश के लिए कुछ भी करने का जज्बा नहीं लेकिन उन्हें देश और सरकार से सब कुछ चाहिए, यहाँ सब बिना कोई तकलीफ उठाये हर सुविधा और आराम चाहते हैं।
  7. यहां लोग, कायर, भ्रष्ट और कामचोर हैं, लेकिन फिर भी उन्हें घमंड है, अपनी नीचता और घटियापन के लिए कोई भी स्वीकार और शर्म नहीं है, लोगों का आत्मसम्मान और चेतना निम्नतम स्तर पर है।
  8. लोग अपने कर्तव्यों के प्रति बिल्कुल भी जागरूक और जिम्मेदार नहीं है और उन्हें सभी अधिकार चाहिए।
  9. राष्ट्र के संसाधनों और संपत्तियों का दुरुपयोग, और उन्हें बिना किसी वजह से नष्ट करना।
  10. जनसंख्या नियंत्रण की ओर बिल्कुल भी जिम्मेदार रवैया नहीं, 75 वर्षों में 30 से 130 करोड़ हो गए, यही है इनकी उत्पादकता और रचनात्मकता, और कोई भी रचनात्मक कार्य इस देश के लोगों को नही आता।
  11. देश में अशांति बढानेवाली और विघटनकारी ताकतों का समर्थन, राष्ट्र द्रोहियों की वकालत और महिमा मंडन।
  12. पाश्चात्य सभ्यता और मूल्यों का अंधानुकरण और हमारी प्राचीन विरासत और मूल्यों का अवमूल्यन और अपमान, जो अमेरिका और यूरोप का है वो सबसे बढ़िया, जो भारतीय और लोकल है घटिया।
  13. गंदगी, अराजकता और अव्यवस्था को बढ़ावा, व्यावहारिक और संवेदनशील सोच और कर्म का अभाव।
  14. विवेकपूर्ण जीवनशैली और जागरूकता का पूर्ण अभाव,भाग्य वादी और अंधविश्वासी लोग।
  15. अनुशासनहीन जीवन और बेहद लापरवाह रवैया, जीवन की सभी छोटी बड़ी महत्वपूर्ण बातों के संबंध में।
  16. झूठ, पाखंड और भ्रष्टाचार में अव्वल नंबर, और फिर भी दूसरे श्रेष्ठ और कर्मठ लोगों के कार्य और नीयत में दोष निकालना, थोड़े से लाभ के लिए अपने राष्ट्र से गद्दारी और शत्रुओं के सहयोग के लिए तैयार।
  17. बहुसंख्यक लोगों के हितों और भावनाओं की उपेक्षा और झूठे, मक्कार और राष्ट्र विरोधी समुदाय और शक्तियों की प्रतिष्ठा और चापलूसी, खुशामद की राजनीति।
  18. भारत की मूल संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत का अपमान, अवमूल्यन और विद्रूपिकरण।
  19. हमारे वास्तविक इतिहास का विद्रूपिकरण और हिंसक और नीच हमलावरो, आतताईयों और हत्यारों का महिमामंडन।
  20. हमारे राष्ट्र के गौरव, वीर सपूतों, क्रांतिकारियों और श्रेष्ठ महामानवों की उपेक्षा और इतिहास से विलोपन।
  21. राजनीति का अपराधीकरण, तुष्टिकरण और वोटबैंक की राजनीति का समर्थन, राष्ट्र हितों की और सुरक्षा की उपेक्षा और राष्ट्र द्रोहियों की प्रतिष्ठा और महिमामांडन।
  22. फिल्मी भांडों और बिकाऊ और भ्रष्ट क्रिकेट खिलाड़ियों के प्रति अंधी दीवानगी, जिन्होंने इस देश के दुश्मनों के आगे धन और शोहरत के लिए खुद को बेच दिया है।
  23. शर्मनाक और घटिया बुद्धिजीवी और कम्युनिस्ट नेता जो इस देश की आत्मा और मूल प्रकृति को नष्ट करने का षडयंत्र पिछले 70 वर्षों से कर रहे हैं, का महिमा मंडन।
  24. दुष्ट और भ्रष्ट कांग्रेसी इटालियन माफिया और उसके मंद बुद्धि परम अयोग्य मूर्ख संतान की गुलामी और चापलूसी और उनका मूर्खतापूर्ण अव्यवहारिक और शर्मनाक महिमामंडन।
  25. अंग्रेजों द्वारा निर्मित शिक्षा और कानून व्यवस्था का आज तक हमारी छाती पर लदा हुआ होना जो सिर्फ हमारा सत्यानाश और शोषण करने के लिए बनाया गया था।
  26. लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाने वाला स्तंभ मीडिया, पक्षपाती, बिकाऊ और हद से ज्यादा भ्रष्ट है, और इस देश में सभी बेहूदी बातों और लोगों के प्रचार प्रसार में लगा है और जनता और सरकार दोनों मूक दर्शक की तरह ऐसा होने दे रहे हैं।
  27. हमारी पूर्ववर्ती और वर्तमान सरकार ने हमारी सेना को आतंकियों और दुश्मन राष्ट्र की गतिविधियों के खिलाफ सही कदम उठाने से रोक रखा है, वो कोई भी कदम हमारे सैनिकों के सम्मान और रक्षा के लिए नहीं उठा पाते है, जो किया जा रहा है वो काफी नहीं है।
  28. आरक्षण की बीमारी और अयोग्यता को प्रोत्साहन, गुणवत्ता विहीन समाज में कभी कुछ भी श्रेष्ट और अनुकरणीय नहीं हो सकता।

बेहद प्रतिभावान लोगों की उपेक्षा और घटिया और अयोग्य लोगों को जाति के आधार पर पद और लाभों का वितरण, यह सामाजिक असमानता और कुंठा को प्रबल रूप से बढ़ाने वाला कैंसर है, जो व्यक्तियों को गुणों के आधार पर समाज और व्यवस्था में स्थान नहीं लेने दे रहा है, यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण एवं अन्यायपूर्ण व्यवस्था है, इसे हटाना होगा।

यह सिर्फ कुछ बातें है, इसके अलावा, सामाजिक, पारिवारिक, सांस्कृतिक और अन्य पहलुओं में भी ढेर सारी विडम्बनाएं है, जो इस महान राष्ट्र को समस्याग्रस्त और पतित बना रही है।

समय की मांग है की इस देश में एक सशक्त और राष्ट्र हित को सर्वोपरि रखने वाले नेतृत्व और कार्यकारी संस्थान, अपनी पूरी क्षमता और रचनात्मकता के साथ कम से कम आगामी एक दशक तक कार्य करे,  जिसकी नींव रखी जा चुकी है, वर्तमान नेतृत्व एक सक्षम और प्रभावी नेतृत्व है और यह 2019 से आगामी सत्र तक पुनः क्रय करेगा ऐसी आशा और विश्वाश है।

वर्तमान प्रशासन ने  सिर्फ 5 वर्षों में,  पिछले 75 वर्षो की गलतियों और दुष्प्रभावों, कुशासन और भ्रष्टाचार की दलदल और बिमारियों से बाहर निकालने और उसे स्वच्छ करने की दिशा में कार्य प्रारंभ कर दिया है।

हमें इसे और मज़बूत और जवाबदेह बनाना होगा, ताकि इतने लम्बे समय से रुके हुए विकास और पुनर्निर्माण और नवनिर्माण के कार्यों को बिना रुके जल्द से जल्द पूरा किया जा सके।

आज भी हमारे सामने नयी नयी चुनौतिया और समस्याएं इस देश के भ्रष्ट राजनेता, सांप्रदायिक ताकतें और वोट बैंक की राजनीति करने वाले और राष्ट्र के दुश्मनों से सांठ गाँठ रखनेवाले और उनके नीच और कुत्सित इरादों और षड्यंत्रों को पूरा करने में सहयोगी कार्यरत हैं, यह सभी लोग इस राष्ट्र को अस्थिर और खंडित करने के लक्ष्य में कभी भी सफल नहीं होंगे और हमे उन्हें उनकी जगह दिखानी होगी।

यह सभी अराजक और देशद्रोही ताकतें और तत्व राष्ट्र की अखंडता और एकता को नष्ट करने वाली विचारधारा, प्रोपेगंडा और भ्रामक बातों का प्रचार, प्रसार और महिमा मंडन करने में पूरी शक्ति से लगे हुए हैं, हमें इन्हें समूल नष्ट करना होगा, इनकी जड़ों को पूरी तरह से काटना होगा।

वर्तमान नेतृत्व ने अपनी कर्मठता और कुशलता में नए कीर्तिमान स्थापित किये हैं जो सराहनीय हैं, लेकिन यह सिर्फ एक छोटी सी शुरुआत है हमें इसे बहुत बेहतर और सशक्त बनाए की जरुरत है, ताकि हमारा महान देश अपने पैरों पर पुनः खड़ा हो सके और अपने अतीत के गौरव और संस्कृति को पुनः प्रतिष्ठित कर सके, इसके लिए कुछ बेहद जरुर बातों का संपन्न किया जाना बेहद जरुरी है जो इस प्रकार हैं –

भारत की समस्याओं के समाधान – (तात्कालिक) 

  1. इस राष्ट्र के सभी वैध और संवैधानिक रूप से स्वीकृत नागरिकों के लिए सिर्फ एक ही पहचान तय की जाये और वो है की वो भारतीय हैं, कोई भी जाति, धर्म, केटेगरी और अन्य लेबल मान्य और स्वीकृत नहीं होगा, इस देश का प्रत्येक वैध नागरिक सिर्फ भारतीय होगा, न कोई हिन्दू, न मुस्लमान, न अल्पसंख्यक न बहुसंख्यक, न अनुसूचित, सूचित और अन्य कोई भी लेबल, सिर्फ भारतीय और कुछ नहीं, किसी भी वजह से नही।
  2. इस देश के सभी नागरिकों के लिए एक ही संविधान और एक ही कानून, कोई भी विशेषाधिकार किसी भी आधार पर किसी को नहीं दिया जायेगा, और न किसी भी प्रान्त और क्षेत्र के व्यक्तियों को कोई विशिष्ट सुविधा या अधिकार दिए जायेंगे, किसी भी कारण से, जिसको भी परेशानी है वो इस देश से बाहर अपनी मर्ज़ी के स्थान पर रहने जा सकता है, इसमें उनकी मदद की जाये।
  3. एक से अधिक बच्चे को जन्म देना कानून अपराध होगा और इसका उल्लंघन करने वाले की को अधिकाधिक कर, दंड वहन करना होगा और उन्हें वोट देने के अधिकार और अन्य व्यक्तिगत और सार्वजनिक सुविधाओं और लाभों से वंचित कर दिया जायेगा।
  4. देश के खिलाफ बयानबाजी, प्रदर्शन और देश के शत्रुओं की पैरवी करने और उनका प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग और समर्थन करने पर सिर्फ आजीवन कारावास या मृत्यु दंड का विधान होना चाहिए।
  5. अभिव्यक्ति की आज़ादी की उचित विवेचना और सीमा निर्धारण, अनर्गल, सांप्रदायिक और राष्ट्र विरोधी प्रदर्शन और वक्तव्य देने वालों को तुरंत प्रभाव से बंदी बनाना और उन पर राष्ट्र द्रोह का मुकदमा चलाकर आजीवन कारावास और अन्य कठोर दंड प्रदान करना,  धर्म और संप्रदाय के आधार पर किसी को भी किसी भी किस्म की विशेष सुविधा और आज़ादी नहीं प्रदान की जानी चाहिए।
  6. नागरिकों को मुफ्त की सुविधाएँ और बेहद कम मूल्य में राशन का वितरण बंद किया जाना चाहिए, क्यूंकि वो इन सभी सुविधाओं का दुरूपयोग कर रहे हैं, व्यक्तिगत आधार पर ही निरीक्षण कर उचित सहयोग और लाभ वितरित करना होगा वास्तविक हितग्राहियों को।
  7. किसानों और खेतिहरों के लिए विशेष प्रशिक्षण और प्रोत्साहन और किसान बाज़ार (Farmers Market)को प्रोत्साहन, फसल के लिए उचित मूल्यों की व्यवस्था, किसानों को अग्रिम पंक्ति में रखना होगा।
  8. स्त्रियों के लिए शिक्षा और स्वास्थय और सुरक्षा की बेहतर व्यवस्थाएं, उनकी कुशलता और उधामिता को विकसित करने की योजनायें और व्यावसायिक कार्यशालाओं की ग्रामीण इलाकों में व्यवस्था।
  9. सरकारी कर्मचारियों के कार्य मूल्याङ्कन और जन पारदर्शिता की व्यवस्था करना, भ्रष्टाचार और अनियमितता के खिलाफ त्वरित और ठोस कार्यवाही और कठोर दंड विधान।
  10. करों की दरों को इस तरह लागू करना जिससे छोटे और बड़े सभी आय समूह के व्यक्ति और संस्थाएं कर भुगतान में रूचि लें, उन्हें कर भुगतान करने पर विशिष्ट लाभ और छूट प्रदान की जाये, और लोगों को और अधिक व्यवसाय और कार्य करने के लिए प्रेरित किया जाये। अधिक धन कमाना, संपत्ति अर्जित करना एक अपराध नहीं होना चाहिये, इसे प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, इसके लिए बेहतर कराधान प्रणाली का निर्धारण और क्रियान्वयन होना चाहिए।
  11. राजनैतिक दलों द्वारा प्राप्त की जाने वाली धनराशी के सम्बन्ध में पारदर्शिता और जवाबदेही की नीति बने होगी, जाति, धर्म और वोट बैंक की राजीनीति करनेवाले दलों पर पूर्ण प्रतिबन्ध और उन्हें चुनाव प्रक्रिया में शामिल होने से बहिष्कृत किया जाना चाहिए, तुष्टिकरण की राजनीति और व्यवस्था को नष्ट करना होगा।
  12. राज्यों के अधिकारों की पुनः विवेचना होनी चाहिए ताकि कश्मीर और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों के उग्रवादी, आतंकी और देशद्रोही नेताओं और असामाजिक, अराजक तत्वों की गतिविधियों और मनमानी व्यवस्था पर जरुरत पड़ने पर अंकुश लगाकर, निर्दोष जनता और संपत्ति की रक्षा की जा सके।
  13. अवैध निवासियों, रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान और उन्हें राष्ट्र से बाहर करने की समर्थ और शक्तिशाली व्यवस्था और उन्हें गैर कानूनी तरीके से देश में आने और निवास करने, पहचान पत्र प्राप्त करने में मदद करनेवाले लोगों और सरकारी मशीनरी पर लगाम और दोषियों को राष्ट्रद्रोह के जुर्म में दंड की व्यवस्था।
  14. लोगों को कृषि आधारित और अन्य उद्योगों को लगाने और उनके लिए बाज़ार उपलब्ध करने की व्यवस्था पर एक सशक्त और व्यवहारिक योजना और क्रियान्वयन।
  15. कृषि के विकास और वितरण की उचित व्यवस्था, हमारा देश विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र होने के साथ गरीबी और भुखमरी में सबसे ऊपर है, हमारी 40% आबादी को आज भी दोनों वक़्त का भोजन उपलब्ध नहीं है, यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
  16. आरक्षण पर पुनर्विचार और यह सिर्फ आर्थिक आधार पर ही लागू होना चाहिए, और सिर्फ जरुरतमंदों और उपेक्षित लोगों को मिलना चाहिए और इसे पीढ़ी दर पीढ़ी नहीं दिया जाना चाहिए किसी को भी, अक्षम लोगों को आर्थिक मदद,  निशुल्क शिक्षा की व्यवस्था आदि लाभ दिए जाने चाहिए, लेकिन उन्हें  रोजगार पद और अधिकार उनकी योग्यता  के आधार पर दिए जाने चाहिए न की उनकी जाति और अयोग्यता के आधार पर।

इस तरह की बहुत सारी बातों और कार्यों की आवश्यकता है, समस्याएं विकास प्रक्रिया का एक अनिवार्य अंग हैं, लेकिन हमे सार्थक और रचनात्मक समस्याओं को हल करने में ही अपनी उर्जा और शक्ति लगानी होगी ताकि देश अपने सर्वांगीण और समुचित विकास के लक्ष्य की और अग्रसर होता रहे। आज भारत विश्व की चौथी महाशक्ति के रूप में उभर कर सामने आ रहा है।

हमें एक बात अच्छी तरह समझ लेना चाहिए की हम कितना भी विकास कर लें और कितना भी जीडीपी बढ़ा लें, यह तब तक कोई मूल्य नहीं रखता जब इतनी बड़ी तादाद में हमारे देश के लोग भूख और गरीबी से जूझ रहे हों, हमारी प्राथमिकता इसे ख़त्म करने की और होनी चाहिएअसली भारत इन्ही ग्रामों और कस्बों में निवास करता है, हमे इनके सशक्तिकरण और विकास के लिए सर्वाधिक कार्य करने की आवश्यकता है

आने वाले 10 वर्षों में भारत विश्व के प्रथम तीन सबसे शक्तिशाली और विकसित राष्ट्रों में से एक होगा, हम सभी भारतवासियों को इस दिशा में कार्य करने की जरुरत है, हमें अपने समस्त भेदों और मत विभिन्नता से ऊपर उठकर अपने राष्ट्र के लिए सोचना और कार्य करना होगा, तभी हमारा राष्ट्र हमारे और पूरे विश्व के लिए एक प्रेरणा और शक्ति का स्रोत बनकर उभरेगा और अपने प्राचीन गौरव और प्रतिष्ठा को पुनः प्राप्त कर सकेगा। 

समय है, हे भारत के वासियों अपनी मातृभूमि के प्रति अपने कर्तव्य और दायित्वों का निर्वाह करो इसे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष राजनैतिक और सांस्कृतिक गुलामी और दुष्प्रभावों, गद्दारों, लूटेरों और इसे बांटने और तोड़ने वालों से मुक्त करो।

हमें एक श्रेष्ठ , विश्वसनीय, परीक्षित और सशक्त  नेतृत्व पुनः प्राप्त हो रहा है, मुझे उम्मीद है भारत विकास और श्रेष्ठ के नए आयाम स्थापित करेगा , हमें इस महान राष्ट्र के पुनर्निर्माण में और इसे इसकी पूरी गारिम और वैभव में विकसित करने के लिए हर संभव रचनात्मक योगदान और त्याग करना होगा।

🙏🌹🙏 जय भारत    🙏🌹🙏        जय माँ भारती      🙏🌹🙏   वन्दे मातरम

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