विकसित राष्ट्र क्रिकेट में कोई रुचि क्यों नहीं रखते?

विकसित राष्ट्र क्रिकेट में कोई रुचि क्यों नहीं रखते?

Quora पर मेरे पाठक ने यह प्रश्न पूछा था  कि इतने सारे पैसे से जुड़ने के बावजूद, चीन, रूस, फ्रान्स, जर्मनी और जापान के लोग क्रिकेट में कोई रुचि क्यों नहीं रखते? क्या इनमें से कोई क्रिकेट में, विश्व में सर्वश्रेष्ठ बन सकता है?

क्रिकेट अधिकांशतः सिर्फ ब्रिटेन के द्वारा शासित देशों में खेला जाता है, जिन्हें अंग्रेजों ने गुलाम बनाया और अपने उपनिवेशों कि तरह अपनी हुकूमत के तले रखा, कोई भी ज्यादा रचनात्मक रुचि रखनेवाले राष्ट्र इस बेहूदे खेल में रुचि नहीं रखते, क्यूंकि यह समय और संसाधनों की क्रूरतापूर्ण बर्बादी है।

जिन देशों का आपने उल्लेख किया वो वैश्विक खेल स्पर्धाओं और ओलंपिक में सबसे ज्यादा सफलता और पदक जीतने वाले राष्ट्र है, उद्योग, विज्ञान और आर्थिक क्षेत्र में सर्वाधिक उन्नत और विकसित देश है, वो इस समय की बर्बादी करनेवाले खेल में बिल्कुल भी रुचि नहीं रखते, इसे हमारे देश के लोगो जैसे आलसी, निकम्मापन और समय की बर्बादी करनेवाले लोग ही पसंद करते हैं।

आज क्रिकेट एक भ्रष्ट, जुआ, खराबी और धन पैदा करने की मशीन बन गया है, इसकी वजह से दूसरे तमाम खेलों का एवम् विश्व स्तरीय खिलाड़ियों का सम्मान नहीं है हमारे देश में, यहां तक कि हमारी शानदार महिला क्रिकेट खिलाड़ियों की श्रेष्ठता और कीर्तिमान के लिए कोई स्थान नहीं यहां।

हमारे ही देश में क्रिकेट की भ्रष्टाचार की वजह से अयोग्य खिलाड़ियों को धन और अवसर मिलते है, उन्हें हाईलाइट किया जाता है, और बेहद प्रतिभावान और कीर्तिमान बनने वाले महानतम खिलाड़ियों को हाशिए पर रख दिया जाता है, अनिल कुंबले, गौतम गंभीर, राहुल द्रविड़ यह महानतम खिलाड़ी है, इन्हे वो एक्सपोजर और हाइप नहीं मिलती।

इसके स्थान पर रवि शास्त्री और इन जैसे अन्य राजनीति करने वाले और खुशामदी लोगों को और मौका दिया जाता है, यह इसे और घटिया और शर्मनाक बनाता है। यहां सौदेबाजी, और चालबाज़ी, और खुशामद का बोलबाला है।

क्रिकेट के दीवाने, क्रिकेट के खिलाड़ियों और उनके स्पॉन्सर्स के लिए उपभोक्ता है और क्रिकेट सबसे ज्यादा बिकने वाली कमोडिटी, इन्होंने खेल, खिलाड़ी भावना और खिलाड़ी की आत्मा और गरिमा को नष्ट किया है, और मूर्ख क्रिकेट प्रेमी अपना कीमती समय, ऊर्जा व्यर्थ कर इन सभी व्यापारियों को अरबपति बना रहे हैं।

कितने लोगों ने इन खिलाड़ियों की तरह जीवन में कुछ हासिल किया है क्रिकेट या ऐसे ही किसी काम से, कितनों का जीवन बेहतर हुआ इससे?

मै पिछले 25 साल में एक भी क्रिकेट मैच नहीं देखा, यह खेल अब खेल नहीं रह गया है, एक भ्रष्ट और निकृष्ट कारोबार वन गया है जो सट्टेबाजी, फिक्सिंग और हर किस्म की दुकानदारी और सौदेबाजी से ग्रस्त है, आज क्रिकेट और खेलों में भ्रष्टाचार समानार्थी हो गए हैं।

मेरे उदगार बहुत सारे क्रिकेट प्रेमियों को बिल्कुल पसंद नहीं आएंगे लेकिन, यह अंग्रेजों की दासता, नीचता और खराबियों की निशानी है और सभी ब्रिटेन शासित देश इससे बुरी तरह ग्रस्त है।

प्रश्न में उल्लिखित और अन्य देश किसी भी खेल में श्रेष्ठ प्रदर्शन करने की क्षमता रखते है और उन्होंने विवेक पूर्वक स्वयं को और अपने नागरिकों को इस बीमारी से दूर रखा है, इसलिए वो इस धरती पर उत्पादन और गुणवत्ता में श्रेष्ठ है, क्यूंकि वो समय और श्रम का मूल्य समझते है।

वो किसी भी ऐसे खेल में शामिल नहीं हैं जहां उनके समय और श्रम का उचित परिणाम उत्पन्न ना कर सके, वहां किसी के पास इतना फालतू समय नहीं की सारे काम काज छोड़कर साल भर पूरा दिन दूसरों कि मूर्खता के लिए समय बर्बाद कर सके।

क्रिकेट को छोड़कर दुनिया में कोई भी खेल ऐसा नहीं जो 90 मिनट से ज्यादा का हो, सिर्फ यही एक बकवास खेल है है जो पूरा दिन या कई दिनों तक खेला जाता है।

सभी क्रिकेट प्रेमियों को चोट पहुंचने के लिए अफसोस है, लेकिन इस पर विचार कीजिए और अपने समय का मूल्य पहचानिए आप अपना समय, दिमाग सब खराब कर रहे है और इन कुटिल और बाजारू खिलाड़ियों और इनसे जुड़े संस्थानों को अरबपति बना रहे है, आपको क्या मिल रहा इस सबसे, ऊर्जा और समय की बर्बादी कि कीमत पर, सबको सन्मति दे भगवान।

धन्यवाद।

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