युवाओं के शिक्षित होने के बावजूद बेरोजगारी क्यों है?

युवाओं के शिक्षित होने के बावजूद बेरोजगारी क्यों है?

Quora पर मेरे एक पाठक ने यह प्रश्न पूछा है शिक्षा दर में बढोतरी के बावजूद महिलाओं में नौकरी की ललक कम क्यों है?

यहाँ इस प्रश्न का उत्तर समस्त तथाकथित शिक्षित युवाओं को ध्यान मे रखकर दिया गया हैशिक्षित होना और विभिन्न कार्यों के लिए उचित कुशलता, अनुभव और आत्मविश्वास का होना बिल्कुल अलग बात है, हमारे अधिकांशतः तथाकथित शिक्षित व डिग्री धारी युवक युवतियों में व्यावहारिक व व्यावसायिक कुशलता और अनुभव का पूर्णतया अभाव होता है।

यह हमारे देश में बेरोजगारी और सारे उपद्रव और असंतोष की वजह है, लोग कुशलता और मेहनत से रिक्त है और सभी को सरकारी नौकरी और सारे सुख सुविधाएं चाहिए बिना किसी बात कि योग्यता धारण किए।

जीवन का सर्वोपरि विधान यह है कि आप जहां से जो भी पाना चाहते है सबसे पहले उसके लिए जरूरी योग्यता और पात्रता विकसित कीजिए और जो आपसे मांगा जाए उसे सहर्ष उपलब्ध कराने के लिए तैयार रहिए उचित गुणवत्ता और परिमाण में, जिसका सर्वथा अभाव है यहां।

जब आप किसी जॉब या प्रोफेशन में काम करना चाहते है तो नियोक्ता को अपने संस्थान या उपक्रम में कुशल कर्मियों की आवश्यकता होती है, जो इन युवक और युवतियों द्वारा उपलब्ध नहीं कराया जाता है।

सभी नियोक्ता उनके पास उपलब्ध कार्य को लाभकारी और त्रुटि रहित तरीके से संपन्न करने की योग्यता रखने वाले कर्मचारियों को ही पसंद करते हैं जो कि व्यावहारिक और प्रासंगिक है।

इसके अलावा महिलाओं के कार्य करने के अन्य पहलू भी है जो हमारे समाज और परिवेश में उन्हें सीमित अवसर व स्थितियां प्रदान करते है।

महिलाओं के साथ, पारिवारिक, सामाजिक रूढ़ियां और बंधन भी इसकी बहुत बड़ी वजह है, उनकी शारीरिक और व्यक्तिगत समस्याएं जैसे मासिक एवम् संतानवती होना, स्त्रियों को अपनी असुरक्षा से संबंधित कारण भी जिम्मेदार है, कार्य अवधि, उचित पारिश्रमिक में लिंग के आधार पर भेदभाव।

यदि महिलाएं उचित कार्यकारी कुशलता के साथ उपरोक्त बातों के साथ सहज संतुलन स्थापित करने में समर्थ हो सके तो वो बड़ी से बड़ी पोजीशन पर अपने आपको ले जा सकती है, पूरे विश्व में इसके उदाहरण मौजूद है, जीवन के सभी क्षेत्रों में महिलाओं ने अपनी श्रेष्ठता सिद्ध की है।

महिलाएं जीवन का ऐसा कोई क्षेत्र नहीं जिसमे अपना परचम नहीं लहरा रही है, अभी कॉमनवेल्थ खेलों में सर्वाधिक गोल्ड हमारी बेटियों ने ही अर्जित किए हैं।

दुनिया कुशलता और प्रतिभा का सम्मान करती है, यदि आप में हुनर है और आप खुद को स्थापित करने के लिए जरूरी योग्यता, कुशलता से युक्त है और सारी व्यावहारिक चुनौतियों का सामना करने उनके अनुरूप स्वयं को बदलने और अपनी काबिलियत साबित करने के लिए तैयार है तो इस धरती में कोई आपको नहीं रोक सकता।

जो आप पाना चाहती/चाहते है उसके लिए आपको तैयार होना होगा और जीवन के जिस भी क्षेत्र में आप अपना मुकाम बनाना चाहते है वहां जो जरूरी है उसे प्रदान करने के लिए प्रस्तुत रहिए, आप को कोई नहीं रोक पायेगा, स्त्री या पुरुष होने के आधार पर विशेषाधिकार की मांग ना करे।

आज के समय में परिवार समाज और सभी घटक महिलाओं के पक्ष में है टेक्नोलॉजी ने स्त्री पुरुष के शारीरिक क्षमता के भेद को खत्म कर दिया है, स्त्रियां हर मामले में पुरुषों से बेहतर परिणाम पैदा कर रही है कर सकती है, सारी दुनिया इसकी गवाह है।

जरूरत है अपनी बेचारगी, कमजोरी और हीनता के आवरण से बाहर निकलने की और जरूरी क्षमता और योग्यता हासिल करने की।

और जो महिलाएं अपने घर में ही रहकर अपने घर परिवार और संतानों की देखभाल में अपना जीवन लगाती है उन्हें अपने योगदान और भूमिका और कार्य को बिल्कुल भी कम नहीं आंकना चाहिए, वो इस धरती पर सबसे गौरवमय कार्य संपन्न कर रही है, उन्हें इस धरती पर सबसे ज्यादा प्रेम और सम्मान मिलना चाहिए।

इस धरती पर जन्म लिए श्रेष्ठ पुरुष और स्त्रियां हमारी मां, बहन, बेटियों और अर्धांगिनी के प्रेम, समर्पण, कुशलता और दक्षता का परिणाम है, उन्होंने इस पृथ्वी को सभी काल और समय में श्रेष्ठतम विभूतियां प्रदान की है और कर रही है, क्या इससे ज्यादा गरिमापूर्ण कुछ और हो सकता है।

तो यदि आप एक मां या समर्पित पत्नी या गृहणी है और अपने परिवार और संतान को श्रेष्ठ जीवन मूल्यों के साथ विकसित और पोषित करने के सर्वाधिक महत्वपूर्ण कार्य में संलग्न है तो आपको किसी और बात के लिए परेशान होने की आवश्यकता नहीं, यह संपूर्ण जगत आपके इस अघोषित, अप्रकाशित योगदान के लिए सदैव ऋणी रहेगा।

सभी को यह देखना चाहिए कि उनके लिए क्या बेहतर और अनुकूल है और उस दिशा और क्षेत्र में जो भी सर्वश्रेष्ठ है उसे जानिए, सीखिए और अपने और अपने परिवेश में जो कुछ भी है उसमे अपना प्रेम पूर्ण योगदान दीजिए, यही सर्वोत्तम योगदान है स्वयं को और सभी को।

धन्यवाद।

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