क्या आध्यात्मिकता सेक्स विरोधी है?

क्या आध्यात्मिकता सेक्स विरोधी है?

Quora पर मेरे एक पाठक ने यह प्रश्न पूछा है क्या आध्यात्मिकता का उद्देश्य आपको सेक्स से दूर ले जाना है?

आध्यात्मिकता का उद्देश्य आपको अपने अस्तित्व से जुड़े सभी आयामों के प्रति जागरूक करना है। यह आपको अपने शरीर और मन में होने वाली क्रियाओं और प्रतिक्रियाओं से प्रति सजग करने की व्यवस्था है, साथ ही अस्तित्व के सभी आयामों तक ले जाने का मार्ग और प्रक्रिया है, यह आपकी कामेच्छा और कम ऊर्जा के श्रेष्ठतम और कल्याणकारी उपयोग की और जाने का मार्ग है।

आध्यात्मिकता आपको अपनी समस्त ऊर्जा को सकारात्मक और रचनात्मक रूप से उपयोग करने की दिशा और समझ प्राप्त करने में सहायक है।

एक कमजोर, अनियंत्रित और दिशाहीन व्यक्ति के हाथों में शक्ति उसके और दूसरों के विनाश का हेतु बनती है, और काम ऊर्जा ऐसी ही प्रबल शक्ति जो बेहद रचनात्मक या विनाशकारी हो सकती है।

हमारी सारी जीवनी शक्ति काम की ऊर्जा ही है, हम सभी में सारी प्रतिभा, रचनात्मकता इसी काम ऊर्जा से संभव होती है, यदि इसका सकारात्मक और उचित उपयोग किया जाए अर्थात इस ऊर्जा को ऊर्ध्व गतित करने से ही ऐसा संभव होता है।

यही ऊर्जा यदि अधोगतित कार्यों और वासनाओं में उपयोगी हुई तो आप काम वासना, अपराध और निम्न स्तरीय विचार, व्यवहार और क्रियाकलाप में ग्रस्त रहेंगे।

आपको विदित है रावण और दुर्योधन, दुशासन, बाली, बिल क्लिंटन, सभी मुगल शासक और तमाम ऐसे लोग, सिर्फ अपनी काम ऊर्जा और आवेगों को सही दिशा नहीं से पाने की वजह से समूल नाश को प्राप्त हुए, और तमाम हिंसक, बलात्कारी, अपराधी और दुष्ट लोग भी उन्हीं की श्रेणी में आते है।

क्यूंकि इन सभी के जीवन में आध्यात्मिकता का कोई स्थान नहीं होता, वो बस अपने मन, शरीर के आवेगों और उनसे उत्पन्न अहंकार से संचालित होते है जो उन्हें अंततः विनाश की और ले जाता है।

एक मुक्त पुरुष और एक कामलोलुप और व्यभिचारी का उच्चतम और निकृष्टतम जीवन, सिर्फ अपनी इस काम ऊर्जा के रूपांतरण की बुद्धि और शक्ति की उपस्थिति और अनुपस्थिति का परिणाम है।

एक आध्यात्मिक व्यक्ति अपनी काम ऊर्जा को जीवन के बेहतर और कल्याणकारी आयामों में नियोजित करता है, और अपने और सभी के जीवन में प्रकाश और रचनात्मकता की वृद्धि करने में सक्षम होता है, वह अपने मन, शरीर और बुद्धि का स्वामी होता है, और उनका सजगतापूर्वक चेतन उपयोग करता है।

एक व्यक्ति जो अपने शरीर और मन के उद्वेग और अपनी कामुकता के हाथों की कठपुतली है अपने और दूसरों के जीवन में अशांति, कुरूपता और इन्द्रियों की गुलामी उत्पन्न करता है।

आध्यात्मिकता मनुष्य को अपना स्वामी बनाती है, उस पर अपने ऊपर अपनी शरीर की रासायनिक क्रियाओं और उनसे उत्पन्न होने वाले उद्वेग और उन्मादों को और बाहरी वातावरण और प्रभावों से उत्पन्न विकारों के सुनियोजन की शक्ति और बुद्धि प्राप्त करने में सक्षम बनाती है।

काम वासना सबसे शक्तिशाली ऊर्जा है इसका रचनात्मक और कल्याणकारी उपयोग, व्यक्ति को स्वयं के लिए और समाज के लिए श्रेष्ठतम उत्पन्न करने में सक्षम बनाना ही आध्यात्मिकता द्वारा संभव है, बिना इसके वो कभी भी अपनी श्रेष्ठता को पहचान और विकसित नहीं कर सकेगा।

इस धरती पर सभी आध्यात्मिक शक्तियां, अवतार, मुक्त पुरुष और परम रचनात्मक लोग वो ही है जिन्होंने अपनी इस परम ऊर्जा को जीवन के सभी आयामों में श्रेष्ठतम का निर्माण करने में लगाया।

और सभी अहंकारी, अत्याचारी, कामुक और व्यभिचारी लोग वो है जो इस ऊर्जा के विनाशकारी उपयोग से ग्रस्त रहे या उनके मानसिक और शारीरिक आवेग उनके बस में नहीं थे।

आप क्या होना चाहते है?

अपने मन शरीर की रासायनिक और हार्मोनल प्रक्रिया का गुलाम होना या उनका स्वामी होना?

यदि आपकी गुलाम होकर नष्ट होने में रुचि है तो दौड़िए उनके द्वारा पैदा किए गए आवेग और उद्वेग ग्रस्त होकर अपनी ऊर्जा को अपने विनाश के लिए, या फिर समझिए अपने मन और शरीर की प्रकृति और उसमे उठनेवाले विकारों और प्रभावों को और लगाईए खुद को उनके समुचित नियोजन की प्रज्ञा और शक्ति प्राप्त करने में।

आध्यात्मिकता आपको काम से दूर नहीं ले जाती आपको उसके श्रेष्ठतम और कल्याणकारी उपयोग के लायक बनाती है, उसके आपके जीवन में उसकी आवश्यकता को सुनिश्चित करके आपके लिए सर्वांगीण तुष्टि और पुष्टि उत्पन्न करने में मदद करती है।

आप क्या होना चाहते है एक योगी की तरह जो अपनी ऊर्जा के ऊर्ध्व गमन की शक्ति और समझ प्राप्त करता है और परमसुख और परम स्वास्थ्य को उपलब्ध करता है

या

फिर एक अनियंत्रित अविचारी भोगी होकर पशुओं से भी निम्नतम जीवन जीकर , रोग, शोक, और विनाश की प्राप्ति करना।

चुनाव सदैव आपका है, इस पुण्य सलिला धरती की संस्कृति का आधार आध्यात्मिकता है, इसने काम को जीवन के परम पुरुषार्थों में से एक कहा है, यह काम का निषेध नहीं उसके उचित नियोजन और रचनात्मक उपयोग की समझ और दृष्टि प्रदान करता है।

यदि आप मनुष्य की तरह काम का उपयोग और लाभ उठाना चाहते है तो आपको इसके आध्यात्मिक पक्ष को अनदेखा नहीं करना चाहिए, पूछिए अपने आप से – स्वामी होना है या दास?

बिना आध्यात्मिक समझ के जीवन के किसी भी आयाम और काम ऊर्जा का सही नियोजन अपने और सभी के कल्याण के लिए नहीं किया जा सकता, आप देख सकते हैं, की सारी पृथ्वी अपने शरीर, मन और इनके उद्वेगो के गुलाम है और त्रस्त, भ्रष्ट और नष्ट हो रहे है।

धन्यवाद।

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