आध्यात्मिकता के कितने प्रकार हैं?

आध्यात्मिकता के कितने प्रकार हैं?

यह प्रश्न मेरे ब्लॉग एवं Quora के प्रबुध्द पाठक द्वारा पूछा गया है 

आध्यात्मिकता के कितने प्रकार हैं? आध्यात्मिकता का कोई प्रकार नहीं होता है, वो रूप, रंग और आकार प्रकार से मुक्त है, वो कोई वस्तु नहीं है कोई ऐसी चीज़ नहीं है जिसके बारे मे आप कोई परिभाषा गढ़ सकें।

आध्यात्मिकता कोई विश्वास या उधार प्राप्त ज्ञान नहीं है यह स्वयं के द्वारा अर्जित आंतरिक बोध की उपलब्धि है, इसका बाह्य उपचारों से कोई भी लेना देना नहीं है, यह स्वयं की खोज और बोध की प्राप्ति की प्रक्रिया है, इसमें विभिन्न साधना पद्धतियाँ उपयोगी है लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात आपकी खोज, संपूर्ण समर्पण, और अपने और जगत के सत्य को जाने की आकंठ प्यास और ललक और अंतहीन प्रयास।

मुझे नहीं पता आपकी आध्यात्मिकता की धारणा क्या है और क्यों है? हमारी संस्कृति मे आध्यात्मिकता के अंतर्गत आतंरिक विकास और स्वयं की खोज की साधना और चेतना के विकास की प्रक्रियाओं को सम्मिलित किया गया है, जो भी बात, विवरण, प्रक्रिया आप को एक आत्म साधक के रूप मे विकसित होने अंतर्मुखी होने और चेतना के विकास की ओर अग्रसर नहीं करती वो आध्यात्मिक नहीं है।

जो भी बात आपको अपनी आतंरिक खोज और  मूल स्वरुप से सम्बंधित करने वाला नहीं है तो वो कुछ और हो सकता है आध्यात्मिक बात बिलकुल भी नहीं हो सकती है। हमारी संस्कृति मे अपनी मूल प्रकृति , स्वरुप और स्वभाव को जानना ही हमारी सारी आध्यात्मिक खोज और साधना का सार है।

आध्यात्मिकता के कितने प्रकार हैं?

सभी योग और ध्यान की विधियाँ, तंत्र, मंत्र, जप आपको एक सत्य के साधक और खोजी के रूप मे व्यवस्थित और स्थित होकर उर्ध्व गतित होने मे मददगार हो वो भी एक योग्य और समर्थ जागृत गुरु के मार्गदर्शन मे वही सार्थक और सच्चा रूप है आध्यात्मिकता का बाकी सब मिथ्याचार और पाखण्ड।

हमारे योगियों, ऋषियों, अवतारों और सदगुरुओं ने हज़ारों वर्षों की साधना, प्रयोग और आत्मोपलब्धि के पश्चात निश्चित विधान और योग और आतंरिक साधना की पद्धतियां विकसित की है और हजारों लाखों लोगो ने उनके मार्गदर्शन मे उनकी मदद द्वारा अपने आत्म स्वरुप को उपलब्ध किया है और इस संसार के चक्र से मुक्त हुए हैं।

जो भी योग्य समर्थ और आत्मोपलब्ध योगी या मुक्त पुरुष आपको इस मार्ग की शिक्षा दीक्षा और साधना मे संलग्न कर सके वो ही आध्यात्मिक ज्ञान और शक्ति से युक्त महामानव है।

ऐसे महायोगी और महामानव इस पावन धरा पर हर काल और समय मे मौजूद रहे है और लाखों लोगो के जीवन को रूपांतरित होने मे सहयोग किया है, उनके द्वारा प्रयुक्त साधना की पद्धतियाँ और शिक्षाएं ही हमारी आध्यात्मिक विरासत है।

भगवान् शिव जो की आदि योगी के रूप मे प्रतिष्ठित है और समस्त विश्व मे किसी न किसी रूप मे पूजे जाते है प्रथम पुरुष हैं जिन्होंने इसे अविष्कृत किया प्राथमिक रूप से और अपने प्रधान शिष्यों के माध्यम से संपूर्ण विश्व मे इसे वितरित किया, महर्षि पतंजलि ने इसे पुनः अविष्कृत किया है।

हमारे वैदिक ऋषियों , भगवान् महावीर, बुद्ध, कृष्ण से लेकर वर्तमान समय मे नानक, कबीर, ओशो , महर्षि रमण, श्री रामकृष्ण परमहंस, और वर्तमान मे सद्गुरु जग्गी वासुदेव इस महान आध्यात्मिक विरासत को सारी दुनिया मे वितरित कर रहे हैं और लाखों लोगो के जीवन को रूपांतरित कर रहे हैं।

इन सभी मुक्त और बुद्ध पुरुषों द्वारा अर्जित और वितरित ज्ञान, शिक्षाएं और साधना की विधियाँ और पद्धतियाँ ही हमारी वास्तविक और सच्ची आध्यात्मिक विरासत है बाकि सब मिथ्या।

आशा है आपके सवाल का जवाब मिल गया होगा, धन्यवाद।

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