सचेतन जीवन

प्यारे दोस्तो,  कुछ  बेहद जरूरी बातें भी है, जिसे मैं सभी के साथ बांटना चाहता हूं, यदि यह आपको रुचिकर लगे एवं  लगन हो इसे सुनने, समझने और ग्रहण करने की और इससे लाभ प्राप्त करने की तो यह बेहतर बात होगी।

मै एक स्वतंत्र, एकाकी और प्रयोगधर्मी व्यक्ति हूं, जीवन को उसके पूरे रूप मे जीना ही मेरे जीवन का मूल उद्देश्य रहा है, और यही आज तक मैंने किया है और करता रहूंगा जीवन पर्यंत।

हम सब में कमजोरियां है, गलत आदतों, सोचों की गुलामी है, हम सभी की असफलताओ की कहानियां है, मेरा अपना जीवन सतत विकास का प्रयोग रहा है, और मैने निरंतर हर दिन अपने आप को बेहतर और सार्थक होने की ओर अग्रसर किया है।

सदा अपनी गलतियों और असफलताओं से सीखा है, मैंने हमेशा अपनी हर कमज़ोरी, असफलता और खराबी को गौर से देखा है और उसे संवारा है, उसे अपनी शक्ति और प्रतिभा में बदला है, यही स्वयं के प्रति सही सलूक है एवं खुद के प्रति जिम्मेदारी और सहयोग।

यह सभी के लिये सदा सम्भव है, चाहे आप कैसे भी हालात, शारिरिक, मानसिक स्थिति मे हों, यदि आप अपने जीवन, शरीर और मन के प्रति सजग और रचनात्मक है, प्रेमपूर्ण हैं और सभी आवश्यक परिवर्तनों के लिये प्रस्तुत है।

यही अपने प्रति धर्म है, तो निश्चय ही आप जीवन के सभी लाभों और उपहारों के अधिकारी हो सकेंगे, वरना वे सदा ख्वाब ही रहेंगे।

safalta

इस दुनिया में हमारे जीवन और उप्लब्धियों से सम्बन्धित सब कुछ हम से ही शुरू होता है और हम पर ही खत्म होता है, इसलिये खुद को हर तरह से स्वस्थ और सक्षम बनाना हमारा एक मात्र कार्य है।

तभी हम जो कुछ भी हमे मिला है, और मिल सकता है, उसका सही और रचनात्मक उपयोग अपने और सभी के लिये कर सकेंगे और उसमें वृद्धि भी कर सकेंगे, वरना हम अपना और अपने से जुड़ी हर बात का सत्यानाश का इंतज़ाम कर रहे है, करते रहेंगे, और इसे हम ही बदल सकते है, कभी भी।

और आज और अभी से अच्छा समय कोई नही है, क्यूंकि अभी नहीं तो कभी नहीं, जो जरुरी बातों को कल पे टालता है उसका कोई कल कभी नही हुआ और ना कभी होगा, हां उसकी जिन्दगी मे हर किस्म की किलकिल जरूर होगी…..हा हा हा, यकीन ना हो तो खुद ही देख लो।

हमारी असली परीक्षा अपनी कमजोरियों, और आदतो की गुलामी से मुक्ति प्राप्त करना है, व अपनी शक्ति और क्षमता का सही बातों और कार्यों मे उपयोग करने में है।

यही एक बात हमें जीवन के रूपांतरण की शक्ति व उसमे सफलता प्राप्त करने योग्य बनाती है। इसके लिये जरूरी है, स्वयं के प्रति जागरूकता एवं अगाध प्रेम और निष्ठा।

मेरे देखे जो अपना भला नहीं कर सकता वो किसी का भला कभी नहीं कर सकेगा, जो अपना नही हुआ, वो किसी का भी नहीं हो सकेगा।

हमें सब कुछ सिखाया और बताया जाता है, सिवाय एक बात के कि जीवन क्या है, और इसे कैसे और सही तरह से जिया जाये?

हम जीवन भर अन्धों की तरह सब कुछ करते रह्ते हैं। धर्म, परिवार, समाज, रूग्ण परम्पराओं, रिवाजों, अवास्तविक आदर्शों, मूढ़तापूर्ण अवैज्ञानिक जीवन शैली, मान्यताओं और आदतों को अपनाकर, और उनमें उलझे रहकर।

इनमें से अधिकांश की व्यर्थता के प्रति अपनी अनभिज्ञता के चलते हम सब, बिना कुछ सोचे समझे और जाने, की यह सब क्या है, और हमें कहां ले जा रहा है।

हम बस हल मे बन्धे बैलों की तरह इन सब बातों का बोझ ढोते ढोते, जिसे परिवार, परम्परा और समाज ने हमारे बिना चाहे हम पर जन्म से थोप दिया है, हम चुपचाप इन्हें अंगीकार कर लेते है।

इनसे मिलने वाले लाभों और सुरक्षा के भ्रम मे भटके हुए, उन सभी अर्थहीन बातो को दोहराते जीवन का अंत कर लेते हैं, और बिना विकसित हुए वैसे ही अन्धे और असहाय मृत्यु को प्राप्त होते हैं।

यह हम सब की कहानी है, लेकिन इसे हम ही बदल सकते हैं, जीवन को जान कर, समझ कर और सही तरीके से जी कर। इसे और गुणात्मकता और रचनात्माकता आधारित बनाकर, यही जीवन का परम लक्ष्य है।

हम सभी इस बात से उदासीन एवं बेहोश हालत में पूरा जीवन बिता देते हैं, और इस तरह हमारा जीवन व्यर्थता में और हमारी जीवन शक्ति गैर रचनात्मक बातों और लक्ष्यों को प्राप्त करने के अनावश्यक संघर्ष में हर बार नष्ट हो जाती है।

और हम खाली हाथ आते है और खाली हाथ इस दुनिया से विदा हो जाते हैं, बिना किसी विकास एवं बोध के। फिर यह चक्र अनंत बार चलता रह्ता है और हम हर बार इस अवसर जिसे जीवन कहते है, व्यर्थ की बातों का पीछा करते-करते खो देते हैं।

 

निश्चय ही हमें यह बहुमूल्य जीवन इस तरह कोल्हू के बैल की तरह जीने और बोझ ढोते मर जाने के लिये नहीं मिला है।

सर्वप्रथम, इन बातों को जानना एवं इसको समझना- कि हम क्या हैं (वर्तमान शारीरिक मानसिक स्थिति) और क्या करना चाहते हैं? (लक्ष्य-जीवन उद्देश्य) क्यूं करना चाहते हैं (प्रेरक तत्व), और कैसे करना चाहते है (दिशा एव विधि) ? इस सब से क्या उपलब्ध होगा, उसकी सार्थकता और उपयोग क्या है?

यह सब जीवन के मूल प्रश्न हैं, और हमें इनके सम्बन्ध में कुछ नही सिखाया और समझाया जाता, ना ही इन सवालो के जवाब हमें कोई और दे सकता है।

यह हमारे अस्तित्व से जुड़े प्रश्न हैं, और इनका जवाब हमें खुद ढूंढना होता है, लेकिन इसके लिये चाहिये साहस, नये और अंजान मे उतरने का, खोजने का, अनुसन्धान करने का, क्या हम इस सब के लिये तैयार है?

सोचिये, हम सब कि हालत उस व्यक्ति जैसी है, जिसे खज़ाना मिला हो लेकिन पता ना हो की उसके साथ करना क्या है?

यह जीवन जो हमें मिला हुआ है, अनंत सम्भावनाओं का द्वार है, लेकिन इसे खोलना और इसके खजाने में से मूल्यवान को धारण करना, श्रमसाध्य है एवं अदम्य साहस एवं धैर्य की मांग करता है, करोड़ों में से कुछ लोग ही इसमें उतर पाने कि योग्यता और पात्रता पूरी कर पाते हैं।

लेकिन यह अवसर हम सभी को समान रूप से मिला हुआ है, लिंग, जाति, समाज, धर्म, आर्थिक-सामाजिक स्थिति और समस्त भेदों से परे, क्यूंकि अस्तित्व हमारी तरह कृपण और तंग दिल नहीं है।

उसने अपने खज़ाने सभी के लिये खोल रखे है। लेकिन, सिर्फ आंखों वाले ही उसे देख पाते हैं, और उसमें प्रवेश कर पाये है, और कभी भी कर सकेंगे। लेकिन दुर्भाग्य से हम मे से अधिकांश लोग इसे मूर्खतापूर्ण बातों और कामों मे नष्ट कर देते है।

कभी भी होश में नहीं आते और इस मूल्यवान अवसर जिसे जीवन कहते है, गंवा देते है, यह हम सब की कहानी है।

अब यह सब आपको दार्शनिक बातें लग सकती है, और यह है भी, क्यूंकि सिर्फ मनुष्य ही है समस्त प्राणी जगत में, जो विचार करने में सक्षम है, और सिर्फ वो ही देख और समझ पाने की योग्यता अर्जित कर सकता है।

हम सब के साथ अनंत सम्भावनायें है, लेकिन उसे वास्तविकता में बदलने के लिये, गहरी समझ और निरीक्षण की जरूरत होती है।

इसके लिये जरूरत होती है, स्वयं के सतत परीक्षण एवं निरीक्षण की। हम में से बहुत से लोग इस सम्बन्ध में ना कभी कुछ सोचते हैं ना ही कुछ करते है।

यह सब बातें सिर्फ उन्ही व्यक्तियों के लिये उपयोगी और रूचिकर हो सकती है, जो जागरुक एवं चेतस जीवन जीने के आकांक्षी है। और मै यहां सिर्फ उन्हीं से सम्बोधित होना चाह्ता हूं और, उन्हे ही इससे लाभ प्राप्त हो सकता है।

मेरे लिये जीवन एक महान अवसर है, मेरे शरीर, मन के महत्तम विकास का और अपनी आत्मा के करीब होने का। उसे प्रकट करने का, इस जगत के सौन्दर्य को देखने का, उसे पीने का, उसमें उतरने का।

और उसमें सजगता पूर्वक हर सम्भव मानवीय तरीके से, अपनी रचनात्माकता अपनी क्रियाशीलता से, उसे और सुन्दर, बेहतर और विकसित बनाने का।

मेरे लिये चारों और अभिव्यक्त जीवन ही जीवंत परमात्मा है”, ऐसा सदगुरु ओशो ने कहा है, और मै इस बात से सहमत हूं।

और जीवन पथ पर अग्रसर हूं, रूग्ण, रूढ़िगत और अप्रचलन को उपलब्ध बातों, कामों, विश्वासों और तरीकों से मुक्त होने के लिये, नये आयामों मे प्रविष्ट होने के लिये, नये प्रयोग करने के लिये, नयी बातें सीखने, नये लोगो से संबंधित होने के लिये, नयी ऊंचाइयो को छूने के लिये।

जो हूं उससे और बेहतर और व्यापक होने के लिये, नये प्रतिमान गढ़ने के लिये, मैं सदैव खुला और तत्पर हूं। अपने आप का हर सम्भव आयाम मे विकास एवं विस्तार करना ही मेरे जीवन का उद्देश्य है।

 

जीवन एक सतत प्रक्रिया है, इसका कोई अंत नही, इसका कोई लक्ष्य नहीं, यह स्वयं एक पूर्णता है। इसके समस्त आयामों में प्रचुरता, और आधिक्य को उपलब्ध करना ही मेरा लक्ष्य है।

और जो कुछ भी आज तक किसी भी आयाम में जाना, सीखा, और अर्जित किया है उसको अपने और अपने से जुड़ी हर बात और व्यक्ति के विकास एवं समृद्धि के लिये प्रस्तुत और उपयोग करना ही मेरा पूर्णकालिक कार्य है।

यही मेरा धर्म है, कर्म है, इस जीवन के प्रति, इस जगत के प्रति, जिसने मुझे प्रतिपल अनगिनत सांसे और लाभ बिना मांगे दिये हैं, और बिना कुछ किये जन्म से लेकर मृत्यु तक मिलते रहेंगे।

मुझे जो कुछ भी यहां से मिला है, मिल रहा है, सभी रूपों में उस सब के लिये मैं समस्त अस्तित्व एवं उन सभी प्रकट-अप्रकट, जाने-अंजाने व्यक्तियों और शक्तियों का तहेदिल से कृतज्ञ हूं और सदा रहूंगा।

जिन्होंने मेरे आंतरिक एवं बाह्य जीवन को छुआ और प्रभावित किया है और मुझे एक ज्यादा परिपक्व, जिम्मेदार, विचारशील, सम्वेदनशील, गहन, और एक शानदार, शक्तिशाली, और बेहद प्रेमपूर्ण व्यक्ति और मनुष्य के रूप मे विकसित होने में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर मदद की है।

हा हा हा , मेरे ख्याल से अपनी इतनी तारिफ़ काफ़ी है, बचपन से ही स्वावलम्बी रहना मुझे पसन्द है, इसिलिये यह काम भी खुद ही कर लेता हूं, लेकिन मैं इस सब से भी बहुत ज्यादा हूं, जिसे शब्दों में नहीं कहा जा सकता ।

और यह हम सब की खासियत है, लेकिन सिर्फ कुछ लोग इसे पहचान पाते हैं, इसकी कद्र कर पाते हैं, और इसे और बेहतर तल पर ले जाते है। मुझसे गहराई से जुड़ने वाला प्रत्येक व्यक्ति इस बात को अच्छी तरह से जानता है।

हम सब में कुछ खास है, इसकी खोज और उसकी परवरिश ही असली काम है, इसिलिये मै खुद को अमेज़िंगसुबाहू कहता हूं, मेरे ब्लाॅग का टाईटल ही इस बात का उद्घोष है की हम सब अमेज़िंगहैं, चाहे हम कितने भी साधारण या असाधारण हालात, स्थितियों और परिवेश कि उपज हो।

कितने ही सक्षम या असक्षम महसूस करते हो, इसे हमें ही खोजना है, लेकिन हम इस बात पर विश्वास नहीं करते, ना ही कभी इसकी खोज करने में रूचि लेते है।

और जीवन एक व्यर्थता का गहन गम्भीर बोझ बनकर हमारी हर सांस पे सवार रहता है और हम इसे मृत्यु पर्यंत गधे की तरह थक कर टूटकर ढोते- ढोते मर जाते हैं। लेकिन हम इस तरह नष्ट होने के लिये जन्म नही लिये हैं, यह जानना और समझना सबसे जरूरी बात है।

 

 

इस तरह मेरा ब्लॅाग सभी चेतन, विकासशील एवं नवीनता के गहन अभिलाषी और प्रयोगधर्मी व्यक्तियों के लिये है, जो जीवन को पूरी तरह स्वस्थ और रचनात्मक तरीके से जीने और हर सम्भव आयाम में विकसित करने में रूचि रखते हैं।

यही मेरे ब्लाॅग की मूलधारा है, और मेरे सारे लेख, अभिव्यक्तियां, प्रयोग और संवाद साथ ही अन्य उपलब्ध जानकारियां, लिंक, सुझाव् जीवन को बेहतर बनाने, सभी सकारात्मक परिवर्तनों को जीवन में कार्यरूप मे परिणित करने और सजगता पूर्वक जीने से सम्बन्धित रहेंगे।

इसमे समाहित है, हमारे, विचार, आदतों, काम-काज़ के तरीके, जीवन की समस्त आवश्यक बातों और गतिविधियों के प्रति हमारे दृषि्टकोण और क्रियाकलाप, और उनमें पूरी तरह सकारात्मक एव रचनात्मक परिवर्तन करने की विधियां, प्रयोग, एवं अनुभव।

यहां वास्ताविक एवं पूर्णतया व्यव्हारिक बातों पर आधारित लेख व सामग्री उपलब्ध रहेगी जिसे आप स्वयं प्रयोग एवं व्यव्हार कर हमेशा जांच सकेंगे की वो आपके लिये उपयोगी और लाभदायक है या नहीं।

लेकिन जो भी यहां पढ़ें, देखें, समझें या प्रयोग करें बिना किसी पूर्वाग्रह के तथा पूरी तैयारी के साथ ईमानदारी पूर्वक करें और बिना वास्तविक अनुभव के ना उन्हें स्वीकार करें ना अस्वीकार, प्रयोग करके ही निर्णय लें।

यदि अपेक्षित परिणाम मिले तो शेयर कीजिये सभी मित्रों के साथ यही निवेदन है और आवश्यक भी।

मै यहां ऐसी किसी भी बात का उल्लेख नहीं करुंगा जो मेरे जीवन का अनुभव नहीं है, या जिसका व्यक्तिगत तौर पे उपयोग, परीक्षण, अवलोकन और रिसर्च नहीं किया है।

आप भी, किसी भी लेख में प्रस्तुत सामग्री को इंटरनेट पर उपलब्ध अनेक संसाधनों पर सर्च करके देख सकते है, तभी उसके सम्बन्ध में कोई धारणा बनाये या उपयोग करे, बिना जाने-समझे कोई भी प्रयोग ना करें या सही तरीके से उपयोग किये बगैर कोई कमेंट या निष्कर्ष प्रस्तुत ना करे।

यहां सिर्फ बातचीत या सुझावों के आदान प्रदान की प्रक्रिया नहीं वरन् जीवन रूपांतरण में रूची रखने के लिये प्रस्तुत व्यक्तियों को ही लाभ प्राप्त हो सकेगा, उम्मीद है, आप सभी इन बातों से लाभ ले सकने में सक्षम रहेंगे।

यदि आपको पसन्द आये तो, वास्तविकता यह है की हमारे मन को ऐसी हर बात से अरूचि होती है, जो उसके बीमार निहित स्वार्थो, रूग्ण आदतो, कायर रवैयो और सीमितता के खिलाफ हो, वो ऐसी हर बात से बचना चाहता है जो नयी हो,जीवंत हो, गैर परम्परागत हो।

इसलिये जो लोग अपने मन और आदतो के गुलाम है, व जिनमे आवश्यक परिवर्तनो के लिये गहरी इच्छा शक्ति ना उन्हे इन बातो से अरूचि ही रहेगी, और उन लोगो मे और मुर्दो मे कोई भी फर्क नही है, और मै यहाँ सिर्फ जिन्दा लोगों के लिए हूँ I

जो इतने कमज़ोर और मजबूर है, उनका वैसे भी कुछ नही हो सकता, जब तक वो अपनी मानसिक गुलामी, और कूपमन्डूक मानसिकता से मुक्त नही हो जाते।

परमात्मा भी ऐसे लोगो के लिये कुछ नही कर सकता जिनकी खुद के कल्याण मे रुचि ना हो, जो खुद के भले कि फिक्र ना करे उसकी फिक्र कोई क्यूँ करेगा।

ऐसे ही लोग भाग्य और परमात्मा को कोसते रहते है, खुद की नालायकी का जिम्मा किसी और को कैसे दिया जा सकता है।

मेरी हर सम्भव कोशिश रहेगी कि आप को श्रेष्ठ एवं पूर्णतया उपयोगी सामग्री उपलब्ध होती रहे, और आप सभी उससे लाभांवित हो सके। तीन सूत्र जागरूकता, ध्यानपूर्वक, समग्रता से उपयोग या अंगीकार, इतना करना बेहद जरूरी है।

इसके बिना किसी भी बात कि सत्यता या प्रभावशीलता का परीक्षण नही किया जा सकता है, और ना कभी किया जा सकेगा। तो तैयार रहें स्वयं के सर्वांगीण विकास, नव निर्माण और खोज की चुनैाती भरी विस्मयकारी यात्रा के लिये

मेरे ख्याल से इस पेज पर काफी बातें हो गयी हैं, और भी बेहतर और मज़ेदार बातें हम आगे भी करते रहेंगे।

यह तो सिर्फ शुरूआत है, मेरे लेखो में अभिव्यक्त बात पसन्द आये या जो भी आपके विचार हो, कमेंट बॅाक्स में लिखिये, कोई सवाल हो तो कीजिये, मेरे पास कोई सही और उचित जवाब होगा तो जरूर आपको उत्तर दूंगा …..

मेरे ब्लाॅग को विज़िट करने के लिये शुक्रिया…..

आपका अपना

अमेजिंगसुबाहू

 

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